सचेतक

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किसी राजनैतिक दल में सचेतक (ह्विप) वह व्यक्ति होता है जो उस दल में अनुशासन बनाये रखने के लिये उत्तरदायी होता है।

व्हिप एक प्रकार का निर्देश हे, जो विभिन्न राजनीतिक दलो के द्वारा अपने दलो के सांसदो के लिए प्रयोग किया जाता हे । सदन मेँ हर दल द्वारा अपने एक व्हिप की नियुक्ति की जाती हे, जो सांसदो की संसद मेँ उपस्थिति ओर मतदान सुनिश्चित करता हे। व्हिप का उपयोग सदन मेँ कोरम बनाए रखने के लिए किया जाता हे तथा पार्टी के निर्देशो के अनुसार कार्य करने के लिए कहा जाता हे। संसद में व्हिप क्या होता है?

        व्हिप का उल्लंघन दल बदल विरोधी अधिनियम के अंतर्गत माना जा सकता हे और सदस्यता रद्द कर दी जा सकती हे।

व्हिप तीन प्रकार की होती हे-

 एक पंक्ति की व्हिप।
 दो पंक्ति की व्हिप ।
 तीन पंक्ति की व्हिप।
       इन तीनों मे तीन पंक्ति की व्हिप महत्वपूर्ण होती हे या कठोर होती है, जिसका प्रयोग अविश्वास प्रस्ताव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे के लिए किया जाता हे तथा उल्लंघन के बाद सदस्य की सदस्यता समाप्त हो जाती हे।
           व्हिप को लोकतंत्र की मान्यताओं के प्रतिकूल माना जाता हे, क्यूंकि इसमेँ सदस्यो को अपने इच्छा से नहीँ, बल्की दल की इच्छा के अनुसार कार्य करना होता हे जो कि लोकतंत्र की भावनाओं के विरुद्ध हे।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

[[श्रेणी:मतदान] WHIIP(व्हिप):सचेतक व्हिप(whip)शब्द का शाब्दिक अर्थ कोड़ा है संसदीय लोकतंत्र में दल में अनुशासन रखने वाले पदाधिकारी को व्हिप या सचेतक कहा जाता है। अंग्रेजी शब्द व्हिप का संसदीय क्षेत्र में सर्वप्रथम प्रयोग 'एडमंड बर्क' ने किया था। बर्क हाउस ऑफ कॉमन्स में एक बाद विवाद में बताया था कि किस प्रकार सम्राट भी अपने अनुयायियों को सभा भवन में लाने का प्रयत्न करते थे। इस प्रक्रिया के लिए बर्क ने व्हिपिंग शब्द का प्रयोग किया था। शीघ्र ही यह संसदीय प्रक्रिया में प्रयुक्त होने लगा।

           संसदीय शासन प्रणाली में

राजनीतिक दल का संसद के भीतर आंतरिक संगठन होता है और उसके अपने सदस्यों में से चुने हुए पहुत से पदाधिकारी होते हैं जो सचेतक का काम करते हैं सच पूछें तो संसदीय लोकतंत्र का सुचारू कार्यकरण बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि सत्तारूढ़ तथा बिरोधी दलों के सचेतक अपनी जिम्मेदारी कितनी कुशलता से निभाते हैं। सचेतकों को अपने दल के सदस्यों से घनिष्ठ संबंध बनाए रखना पड़ता है। उनकी विशेषताओं रुचियों और सम्भावनाओं की जानकारी रखनी पड़ती है। वे किसी चर्चा या वाद-विवाद में भाग लेने वाले अपने सदस्यों के नामों की सूची अध्यक्ष के पास भेजते हैं। वे सदस्यों को सदन के विचाराधीन कार्यों के संबंध में सूचना देते हैं अउ उनमे अनुशासन लागू करते हैं। सचेतके, दल के नेताओं और सामान्य सदस्यों के बीच कड़ी का काम करते हैं और दोनों को एक दूसरे के भावनाओं से अवगत कराते रहते हैं।

भारतीय लोकसभा में इस वक़्त सरकारी पक्ष का मुख्य सचेतक संसदीय कार्य मंत्री होता है। उसके कर्तव्यों में एक यह है कि वह संसदीय कार्य के बारे में सरकार को परामर्श देता रहे और विभिन्न मंत्रालयों के साथ संसदीय कार्य के संबंध में संपर्क बनाए रखे,,,।