संरक्षणवाद

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संरक्षणवाद वह आर्थिक नीति है जिसका अर्थ है विभिन्न देशों के बीच व्यापार निरोधक लगाना। व्यापार निरोधक विभिन्न प्रकार से लगाये जा सकते है जैसे :- आयातित वस्तुओं पर शुल्क लगाना, प्रतिबंधक आरक्षण और अन्य बहुत से सरकारी प्रतिबंधक नियम जिनका उद्देश्य आयात को हतोत्साहित करना और विदेशी समवायों (कंपनियों) द्वारा स्थानीय बाजारों और समवायों के अधिग्रहण को रोकना है। यह नीति अवैश्विकरण से सम्बंधित है और वैश्वीकरण और मुक्त व्यापार के बिलकुल विपरीत है, जिसमें सरकारी प्रतिबंधक बाधाओं अतिन्युन्य रखा जाता है ताकि विभिन्न देशों के बीच व्यापार सुगमता से चलता रहे। इस शब्द का उपयोग अधिकतर अर्थशास्त्र में किया जाता है जहाँ संरक्षणवाद का अर्थ ऐसी नीतियों का अपनाया जाना है जिससे उस देश के व्यापार और कर्मचारियों की विदेशी अधिग्रहण रक्षा की जा सके। इसके लिए उस देश की सरकार द्वारा दूसरे देशों के साथ किये जाने वाले व्यापार का विनियमन या प्रतिबंधन किया जाता है।

इतिहास[संपादित करें]

भारत में संरक्षणवाद[संपादित करें]

संरक्षणवादी नीतियाँ[संपादित करें]

इसके लिए आयात निर्यात पर मात्रात्मक प्रतिबंध लगाया जाता है। जिससे इस पर नियंत्रण किया जा सके।


संरक्षणवाद के पक्ष में तर्क[संपादित करें]

संरक्षणवाद के विरोध में तर्क[संपादित करें]

वर्तमान वैश्विक रुझान[संपादित करें]

हाल ही के दिनों में कतर के साथ उसके पड़ोसी देशों को लेकर जिस तरह का माहौल तैयार हुआ है उसे कहीं न कहीं संरक्षणवाद की नीति भी बताई जा रही है।एक ओर जहां सऊदी अरब,बहरीन,मिस्र आदि देशों ने कतर के साथ आतंकवाद को शरण देने के कारण रिश्ते तोड़ लिया है,वहीं कतर इसे राजनीतिक संरक्षणवाद कह अपनी संप्रभुता पर ठेस बता रहा है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]