संजय (महाभारत)
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| संजय | |
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नेत्रहीन राजा धृतराष्ट्र को दूरदर्शी कथावाचक संजय कौरव और पांडव कुलों के बीच युद्ध की घटनाओं से संबंधित सुनता है | |
| जानकारी | |
| लिंग | नर |
| पेशा | सलाहकार सारथी |
| घर | Hastinapura |
संजय (संस्कृत: सञ्जय, सञ्जय; जिसका अर्थ है "विजय", "जीत") या संजय गावलगण प्राचीन भारतीय हिंदू युद्ध महाकाव्य महाभारत के सलाहकार थे।[1] महाभारत में - पांडवों और कौरवों के बीच युद्ध की एक प्राचीन कहानी - अंधे राजा धृतराष्ट्र कौरव पक्ष के प्रमुखों के पिता थे। सारथी गावलगण के पुत्र संजय, धृतराष्ट्र के सलाहकार और उनके सारथी भी थे। संजय ऋषि कृष्ण द्वैपायन वेद व्यास के शिष्य थे और अपने गुरु राजा धृतराष्ट्र के प्रति अत्यधिक समर्पित थे। संजय - जिसके पास घटनाओं को दूर या दिव्य दृष्टि से देखने का उपहार था, धृतराष्ट्र को बताता है कुरुक्षेत्र के चरम युद्ध में कार्रवाई, जिसमें भगवद गीता भी शामिल है।[2]