श्रोगेन सिन्ड्रोम

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श्रोगेन सिन्ड्रोम (Sjögren's syndrome (SjS, SS)) वह रोग है जिसमें शरीर की नमी पैदा करने वाली ग्रन्थियाँ नमी बनाना बन्द कर देतीं हैं। इसके कारण शुष्क मुख एवं शुष्क नेत्र की समस्या एवं अन्य कई समस्याएँ पैदा होतीं हैं।

शोग्रेन्स सिन्ड्रोम से उत्पन्न शुष्क त्वचा की विशेष देखभाल जरूरी है। खुजली, लालिमा, फटना या गलना - यह सब शुष्क त्वचा के लक्षण हैं। शुष्क त्वचा का प्रमुख कारण है शोग्रेन्स रोग द्वारा शरीर में प्रतिरोधक क्षमता की कमी और इससे नमी पैदा करने वाली ग्रंथियों का निष्क्रिय होना। एक बार निष्क्रिय होने पर तेल अथवा पसीने की ग्रंथियां पुनः सक्रिय नहीं हो सकतीं। हालांकि शोग्रेन्स सिन्ड्रोम से पीड़ित रोगी को सूखी त्वचा से परेशानी लगभग पूरे वर्ष बनी रहती है, फिर भी इसके लक्षण सर्दी के मौसम में अधिक प्रबल हो जाते हैं। बाहों, पैरों व कमर पर शुष्क त्वचा का सबसे गंभीर असर होता है।

शोग्रेन्स सिन्ड्रोम के मरीजों हेतु हेतु शैक्षणिक जानकारी[संपादित करें]

  • शरीर में नमी बनी रहे इसके लिऐ पूरे दिन पानी पर्याप्त मात्रा में पीते रहें।
  • हल्के गुनगुने पानी से स्नान करें, किन्तु दिन में अधिकतम दो बार। तेज गरम पानी से नहीं नहायें क्योंकि इससे त्वचा की प्राकृतिक नमी व चिकनाई नष्ट होती है।
  • हल्के मॉइसच्राइजिंग साबुन का प्रयोग करें विषेषतः जिसमें ग्लिसरीन, कोको बटर या ग्वारपाठा (एलोवेरा) शामिल हो।
  • बेसन, उबटन या खुरदुरे झामों का उपयोग कतई न करें।
  • स्नान के बाद हल्के हाथों से शरीर को तौलिये से पोंछे व मॉइसच्राइजर की हल्की परत लगायें। मालिश न करें, क्योंकि मालिश करने से त्वचा को और भी हानि पहुंच सकती है।
  • गर्म मौसम में नारियल तेल व मूंगफली के तेल का उपयोग त्वचा को सूखने से बचाता है। सर्दियों में पेट्रोल जैली, तिल्ली, कपास या अरण्डीका तेल लाभकारी रहता है। बाजार में अनेक अच्छे मॉइसच्राइजर भी उपलब्ध हैं।
  • तैरने के तुरंत बाद शावर से स्नान करें व मॉइसच्राइजर का उपयोग करें।
  • पूरी बांह के सूती कपडे़ पहनें। सर्दियों में सूती कपडों की एक से अधिक परत पहनें।
  • ऊनी व सिंथेटिक कम्बल के नीचे सूती या साटन का खोल या परत लगायें।
  • कड़ी धूप और तेज हवा हो तो अपनी त्वचा को पूरी तरह से ढ़क कर रखें।
  • शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिले इसके लिये हर दिन कुछ समय धूप में बैठें या घूमें।
  • कुछ मरीजों को हाइड्रो-एक्सवाई-क्लोरोक्विन जैसी दवाई के सेवन से त्वचा सांवली पड़ने की संभावना रहती है, परन्तु यह बाद में ठीक हो जाती है।
  • जो मरीज सर्दियों में अंगूठे व अंगुलियों के सफेद, नीले व लाल होने का आभास कर रहे हैं वे अपने हाथ व पाँव हमेशा गर्म रखें।
  • पैरों की त्वचा पर दाग चकत्ते पड़ने की स्थित में लम्बे समय तक खड़ा रहने से बचें।
  • आपके कमरे का तापमान आदर्श 30 डिग्री सेल्सियस बना रहे इसके लिये कूलर, एसी, हीटर, सिगड़ी आदि का उपयोग करें। यह तापमान त्वचा के लिये सबसे उपयुक्त रहता है।
  • कमरे में नमी बनी रहे इसके हयूमिडिफाइर या बडे़ बर्तन में पानी भर कर रखने से लाभ मिलता है।
  • सर्दियों में फर्श पर सूती कालीन चटाई का ही उपयोग करें।
  • खिड़कियों पर कांच के स्थान पर लकड़ी के शटर का उपयोग व लकड़ी/पीवीसी का फर्श वातावरण को अधिक नम बनाये रखता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]