श्रेणी:धर्म का दर्शन

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वैशाली चौमुखी महादेव यहाँ मिट्टी के पांच ढेला चढ़ाने से प्रसन्न होते है चार देव यूँ तो हर मंदिर की अपनी अलग कहानी है। कहीं पेड़ा-बतासा तो कहीं भांग-धतूर, तो कहीं बलि का महत्व है, पर आपको जानकर आश्चर्य होगा कि एक मंदिर ऐसा भी है जहां चढ़ावे में पांच ढेला चढ़ाने मात्र से लोगों की मन्नत पूरी होती है।  यह मंदिर वैशाली जिले के वैशाली प्रखंड स्थित कम्मन छपरा गांव में है। कालांतर में ढेलफोरवा बाबा के नाम से प्रचलित वर्तमान में श्री विक्रमादित्य चतुर्मुख महादेव के नाम से प्रसिद्ध है। यहां सवा सौ फीट ऊँचे मंदिर में चार मुख वाली शिवलिंग स्थापित है। इसमें पूरव में सूर्य देव, पश्चिम में में विष्णु, उत्तर में ब्रह्मा व दक्षिण दिशा की ओर भगवान शिव का खुला तीसरा नेत्र वाला मुख है। इस शिवलिंग के नीचे सात चक्र है जिसे लोग आर्घा कहते है। इनमें से दो चक्र जमीन से ऊपर है तथा अन्य पांच चक्र जमीन के नीचे है। जिसकी खुदाई नहीं कि जा सकी।  वैज्ञानिक दृश्टिकोण से बताया जाता है कि यह शिवलिंग कॉस्मोलॉजी पद्धति पर निर्मित है। ऊपरी दोनों चक्र के बीच में एक सांकेतिक भाषा में विशेष निर्देश दिया गया है। जिसे लोग ब्राह्मी लिपि में लिखे होने की बात कहते है। हालांकि इसे आज तक कोई पढ़ नहीं सका है। इस मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश के चार रास्ते बनाये गए है। स्थानीय लोग की माने तो पोखर की खुदाई के वक्त शिवलिंग निकला था। उस वक्त जो लोग शुभकार्य से पहले उस शिवलिंग पर पांच मिट्टी का ढेला चढ़ाते थे उनके कार्य सफल होते थे। तब से यह शिवलिंग ढेलफोरवा महादेव के नाम से प्रचलित हुआ। शिवलिंग की गहराई जानने के लिए और खुदाई की गई। तब उसके निचे राजा विक्रमादित्य के काल के दो सोने के सिक्के मिले। तब लोगों ने उन्हें विक्रमादित्य चतुर्मुख महादेव का नाम दिया। सावन माह में यहां पूरे महीने मेला लगा रहता है। चतुर्मुख महादेव के जलाभिषेक के लिए कावंरिया रेवा, पहलेजा व लालगंज के नारायणी नदी से जल लेकर हर सोमवार को पहुँचते है। स्थानीय शिल्पकार दिनेश प्रसाद सिंह ने मंदिर का नक्शा तैयार किया। जो पौराणिक मंदिर निर्माण शैली हस्त कमल पर आधारित है। जिसे काफी दूर से भी देखा जासकता है। वर्तमान में यह मंदिर स्थानीय 11 सदस्यीय कमेटी की देखरेख में धार्मिक न्यास परिषद के अधीन है।  कमेटी में ये लोग है शामिल:कमेटी के अध्यक्ष राम सेवक राम, उपाध्यक्ष लखिन्द्र प्रसाद सिंह, सचिव हरिहर प्रसाद सिंह, उपसचिव संजय कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष राजकिशोर राय, उपकोषाध्यक्ष राजगीर राय, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, शशि भूषण प्रसाद सिंह, रीतलाल राय, सामंत कुमार व दिनेश प्रसाद सिंह बतौर सदस्य है। सचिव हरिहर प्रसाद सिंह ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण में पारू के पूर्व विधायक नितेश्वर प्रसाद सिंह का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने चतुर्मुख महादेव की महत्ता बताते हुए कहा कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहाँ जल चढ़ाते है उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। इस मन्दिर में सालों भर विवाह, उपनयन संस्कार, मुंडन व पूजा-पाठ होती है।

                                                                                              लेखक...
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