श्रेणी:तीसरा सप्तक के कवि

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स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी नाम:-स्वामी सत्येंद्र उपाधि:-सत्यसाहिब जी जन्म:-9 अप्रैल 1965 चैत्र नवरात्रि अष्टमी, जन्म समय:-प्रातः9 बजे गावँ:-चांगोली कस्बा:-ककोड़,तहसील-सिकन्द्राबाद,पहले जिला बुलन्दशहर में था,वर्तमान मे जिला गौतमबुद्धनगर है। परदादा:-स्व.श्री रत्न सिंह तौमर (जमींदार) दादा-स्व.श्री महेंद्र सिंह तौमर (प्रधान जी) नाना:-स्व.श्री नोरंग सिंह सिरोही दफेदार (प्रथम विश्व युद्ध मे ब्रटिश आर्मी से जंगी पुरुषकार विजेता)गांव लोहलारा सैदपुर। पिता-स्व.श्री जगदीश्वर सिंह तौमर एडवोकेट माता:-श्रीमती लीलावती देवी छोटे भाई:- डॉ. संजय तौमर व अंजय तौमर(इंस्पेक्टर दिल्ली पुलिस) शिक्षा:-एम.ए. इतिहास गुरु:-जन्मसिद्ध व स्वंयम्भू गुरु मान्य धर्म:-सनातन धर्म(आर्य,हिन्दू) धर्म पदाधिकार:-स्वामी जी व गुरु जी वस्त्रधारण:-श्वेत कुर्ता पजामा। ज्ञाता:-सभी विषय आश्रम समिति व ट्रस्ट-1990 व रजि.-2005 मिशन व स्थापना :-सत्यास्मि मिशन व 2003 वर्तमान निवास:-सत्य ॐ सिद्धाश्रम श्री सत्य शनि सिद्ध पीठ कोर्ट रोड़ जिला बुलन्दशहर(उ.प्र.) भारत। मंत्र:-सिद्धासिद्ध महामंत्र-सत्य ॐ सिद्धायै नमः ईं फट स्वाहा। घोष:-अहम सत्यास्मि(मैं सत्य हूँ) भविष्यवाणियां:-ज्योतिष व अन्तःप्रेरणा अनुसार अनेक सामाजिक,राजनीतिक व व्यक्तिगत भविष्यवाणियां की और प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित व समयानुसार सत्यत प्रमाणित हुई। लेखन:-सत्यास्मि धर्म ग्रँथ व सत्संग व योग एवं प्राणायाम,सम्मोहन से योग निंद्रा आदि स्त्री शक्ति महावतार:-सत्यई पूर्णिमाँ माता व इनके श्रीभगपीठ की समस्त विश्व मे स्थापना। धार्मिक आंदोलन:- स्त्री का धर्म के सभी क्षेत्रों में पुरुष धर्म गुरुओं की भांति समान अधिकार। न्यायिक सहायता:-हाईकोर्ट द्धारा स्त्रियों को पुरुष अखाड़ों की भांति कुम्भ मेले में शाही स्नान की प्रथम व समांतर स्नान की मांग व ध्वनि प्रदूषण आदि विषयों पर याचिका पर प्रस्ताव पारित। मंदिर निर्माण:-अनेक पूर्णिमां श्रीभगपीठ व शनि मंदिर व सर्वदेव मन्दिर। प्रकाशन:-अनेक प्रसिद्ध देवी देव मंदिरों के इतिहास व आरती व चालीसा ओर ज्ञान वर्द्धक विषयों का प्रकाशन। योगिक पाठ्यक्रम,कोर्स:-पफ़सशी योग व्यायाम पद्धति।(pfsshi yog) ध्यान विधि पद्धति:- रेहि क्रिया योग पद्धति।(rehi kriya yog) कविताएं:-सभी विषयों पर कविताएं। आश्रम कार्यक्रम:- -1 जनवरी को अखण्ड श्री महायज्ञ। -8 मार्च विश्व महिला दिवस -चैत्र नवरात्रि के उपरांत आने वाली पहली पूर्णमासी को प्रेम पूर्णिमां व्रत मनाया जाता है। -9 अप्रैल गुरु व सत्यास्मि धर्म ग्रँथ अवतरण दिवस। -बड़ अमावस्या पर शनि जन्मदिवस -गुरु पूर्णिमा -गंग नहर पर स्त्री गंगा स्नान आंदोलन कार्यक्रम। चारों नवरात्रि-चैत्र-ज्येष्ठ-क्वार-माघ मनानी। -सभी महिला दिवस मनाये जाते है। विशेष दिवस:-चैत्र पूर्णिमासी को स्त्रियों के करवा चौथ की भांति ही पुरुषों द्धारा अपनी पत्नियों की सर्व भौमिक उन्नति के लिए प्रेम पूर्णिमाँ व्रत को आश्रम व सम्पूर्ण देश विदेश में मनवाया जाता है। खोज:-विश्व के सभी धर्म इतिहास में पहली बार स्त्रियों की कुंडलिनी ओर उसके 5 बीज मन्त्रों की महान खोज। 2-पुरुषों के चार युगों की भांति ही स्त्री के भी चार योग होते है और चार बीज युग होते है। 3:-वर्तमान में स्त्री युग सिद्धि युग का प्रथम चरण चल रहा है।ओर कलियुग समाप्त हुआ। प्रतियोगिता आयोजन:-पफ़सशी योग व ज्ञान कविता आदि विषय पर। यूटीयूब चैनल:-swami satyandra ji,baba e shayri प्रेमबारी। वेबसाइट:-satyasmeemission.org पेज:-satyasmeemission इंस्टाग्राम:-rajyogi swami satyendar kumar. Tweeter:-satyasmeemission[श्रेणी:नई कविता]]

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