शॉक

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शॉक को संचार शॉक भी खा जाता है जिससे जीवन को खतरा होता है। यह वह स्थिति है जिसमे रक्त का छिडकाव कम हो जाता है जिससे कोशिकाए और ऊतकों को भी नुकसान पहुंचता है। शॉक के कारण रक्तचाप कम हो जाता है, हार्ट रेट बढ़ जाता है और शारीर के सहने की शमता कम हो जाती है। शॉक के कारण हाइपोजेमिया, हृदय गति रुक जाती है और सांस का रुकना भी संभव है। रक्त की आपूर्ति कम होने से मृत्यु भी हो जाती है।[1] शॉक की स्थिति हर एक इंसान में अलग होती है। शॉक लगने के तुरंत बाद की स्थिति में दिल का दौरा पड़ता है जिससे मिक्स्ड वेनस ऑक्सीजन सेचुरेशन कम हो जाती है। शॉक लगने से रक्तस्त्राव की स्थिति देखने को मिलती है और बच्चो में शॉक के कारण उलटी और दस्त होना भी आम बात है। शॉक के कारण दिल की कोशिकाए कमजोर हो जाती है जिसके कारण मायोकार्डियल इनफर्कशन होना संभव है। [2]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Olaussen A, Blackburn T, Mitra B, Fitzgerald M (2014). "Review article: shock index for prediction of critical bleeding post-trauma: a systematic review". Emergency medicine Australasia. 26 (3)
  2. Silverman, Adam (Oct 2005). "Shock: A Common Pathway For Life-Threatening Pediatric Illnesses And Injuries". Pediatric Emergency Medicine Practice. 2