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शतवर्षीय युद्ध

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शतवर्षीय युद्ध (फ़्रांसीसी: Guerre de Cent Ans; 1337–1453) इंग्लैंड और फ़्रांस के बीच लड़ा गया एक युद्ध था जो लगभग 116 वर्षों तक चला। इस युद्ध का प्रमुख कारण फ़्रांसीसी उत्तराधिकार को लेकर 'हाउस ऑफ वोलोइस' (House of Valois) और 'हाउस ऑफ प्लान्टाजेन्ट' (House of Plantagenet) के बीच विवाद था। इस युद्ध ने दोनों देशों के इतिहास को गहराई से प्रभावित किया।

युद्ध के कारण

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युद्ध के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:

  • उत्तराधिकार का संकट : 1328 में फ्रांस के राजा चार्ल्स चतुर्थ की कोई पुत्र नहीं थी। उनकी मृत्यु के बाद, फिलिप षष्ठम राजा बने। इंग्लैंड के राजा एडवर्ड तृतीय, जो चार्ल्स की बहन का पुत्र था, ने स्वयं को फ्रांस का वैध राजा घोषित किया। फ्रांसीसी सामंतों ने उनके दावे को ठुकरा दिया, क्योंकि सैलिक कानून के तहत महिलाओं के वंशजों का दावा स्वीकार नहीं था।
  • संपत्ति विवाद : इंग्लैंड के राजा एक्विटेन के बड़े भू-भाग के स्वामी थे। फ्रांस का राजा चाहता था कि यह भूमि उसे वापस मिल जाए, जबकि इंग्लैंड का राजा इसे बनाए रखना चाहता था।
  • आर्थिक एवं राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता : फ्लैंडर्स का समृद्ध कपड़ा उद्योग इंग्लैंड की ऊन पर निर्भर था। फ्रांस चाहता था कि फ्लैंडर्स पर उसका नियंत्रण हो, जबकि इंग्लैंड अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता था।

युद्ध के प्रमुख चरण एवं युद्ध

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यह युद्ध कई चरणों में लड़ा गया, जिसके बीच लंबे युद्धविराम भी हुए।

प्रारंभिक चरण: इंग्लैंड की सफलता

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युद्ध के आरंभिक दौर में इंग्लैंड को महत्वपूर्ण सफलताएँ मिलीं।

  • क्रेसी का युद्ध (1346): इस युद्ध में इंग्लैंड की छोटी सेना ने लंबे धनुष (लॉन्गबो) का कुशलता से उपयोग करते हुए फ्रांस की बहुत बड़ी सेना को पराजित किया।
  • पॉयटियर्स का युद्ध (1356): इंग्लैंड ने फ्रांस को एक बार फिर हराया। फ्रांस का राजा जॉन द्वितीय बंदी बना लिया गया।
  • एजिनकोर्ट का युद्ध (1415): इंग्लैंड के राजा हेनरी पंचम ने फ्रांस पर आक्रमण किया और एजिनकोर्ट में एक बार फिर मुट्ठीभर अंग्रेजी सेना ने फ्रांसिसियों को हराया। इस जीत के बाद, इंग्लैंड ने फ्रांस के बहुत बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया।

निर्णायक मोड़ : जोन ऑफ आर्क

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इंग्लैंड की लगातार जीत से फ्रांस की स्थिति निराशाजनक हो गई थी। ऐसे में एक किसान की बेटी, जोन ऑफ आर्क ने फ्रांस का भाग्य बदल दिया। उसने दावा किया कि उसे ईश्वर की आवाज़ें सुनकर फ्रांस को बचाने का आदेश मिला है।

  • ऑरलियन्स की घेराबंदी (1429): जोन की अगुवाई में फ्रांसीसी सेना ने ऑरलियन्स शहर को अंग्रेजों की घेराबंदी से मुक्त कराया। यह एक निर्णायक जीत थी जिसने फ्रांसीसी मनोबल को पुनर्जीवित किया।
  • इसके बाद, जोन ने भावी राजा चार्ल्स सप्तम का रैम्स में राज्याभिषेक करवाने में सफलता पाई। बाद में, उसे बर्गंडियों ने पकड़कर अंग्रेजों को सौंप दिया, जिन्होंने उसे 1431 में जिंदा जला दिया। परन्तु उसके बलिदान ने फ्रांस में राष्ट्रवाद की भावना को और प्रज्वलित किया।

अंतिम चरण : फ्रांस की विजय

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जोन ऑफ आर्क की मृत्यु के बाद भी फ्रांसीसी पुनरुत्थान जारी रहा। राजा चार्ल्स सप्तम ने एक स्थायी और शक्तिशाली सेना का गठन किया। धीरे-धीरे फ्रांसीसी सेना ने अपने खोए हुए क्षेत्रों को वापस जीतना शुरू कर दिया। अंततः, कैस्टिलियन की लड़ाई (1453) में फ्रांस की निर्णायक जीत के साथ युद्ध समाप्त हो गया। इसके बाद, कैले शहर को छोड़कर, इंग्लैंड का फ्रांस में कोई अधिकार नहीं रहा।

युद्ध के प्रभाव एवं परिणाम

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शतवर्षीय युद्ध के गहरे और दूरगामी परिणाम हुए:

  • राष्ट्रीय पहचान : इस युद्ध ने इंग्लैंड और फ्रांस दोनों में राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना को मजबूत किया।
  • सैन्य क्रांति : इस युद्ध ने युद्ध के पारंपरिक तरीकों को बदल दिया। घुड़सवार सेना (नाइट) का महत्व कम हो गया और पैदल सेना, तीरंदाजी तथा तोपखाने का महत्व बढ़ गया।
  • फ्रांस की एकता : युद्ध के अंत में फ्रांस की जीत हुई और वह एक शक्तिशाली केंद्रीकृत राज्य के रूप में उभरा।
  • इंग्लैंड में अशांति : इंग्लैंड की हार और युद्ध के भारी खर्च ने आंतरिक असंतोष को जन्म दिया, जिसके परिणामस्वरूप गुलाबों का युद्ध (1455-1487) हुआ।

इन्हें भी देखें

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बाहरी कड़ियाँ

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सन्दर्भ

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