व्यक्तित्व का वर्गीकरण

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विभिन्न प्रकार के व्यक्तियों का मनोवैज्ञानिक वर्गीकरण व्यक्तित्व प्ररूप (Personality type) कहलाता है। कभी-कभी व्यक्तित्व प्ररूप और व्यक्तित्व विशेषक (personality traits) को अलग-अलग माना जाता है।

पति यदि गम्भीर, सीरियस नेचर का हो, तो महिलाएं क्या करें?...

अमृतमपत्रिका, ग्वालियर से साभार-

पति का स्वभाव अंर्तमुखी होना अच्छी बात नहीं है। बेहतरीन सामंजस्य के लिए पति को कुछ मजाकिया मूड का होना जरूरी है। गम्भीर या सीरियस होने से पत्नी को बहुत चिढ़न होने लगती है। ये वो लोग होते हैं कि कभी प्यार करना नहीं जानते।

सहवास या सेक्स प्रक्रिया के दौरान भी खाना खाया, काढ़ा पिया, नाड़ा खोला, गुनताड़ा लगाया और काम निपटाकर यानि सम्भोग करके सो जाते हैं।

मानते हैं कि जोड़ी ऊपर वाला बनाता है। लेकिन पुरुष घोड़ी बनाकर अपना काम निकालकर अन्य जिम्मेदारी भूल जाता है।

ये सीरियस लोग स्वयं को बहुत महान समझते हैं। ज्ञान का पुलन्दा होते हैं। ये पढ़े-लिखे जरूर होते हैं, लेकिन गुणी नहीं होते। मर्द होकर भी किसी का दर्द नहीं समझते। अपनी इच्छाएं भी इन्हें बतानी पड़ती हैं।

मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक आदमी तीन तरह के होते हैं-इनके व्यक्तित्व को तीन भागों में बांटा है- ●अंतर्मुखी, ●बहिर्मुखी ●उभयमुखी। विशेषताएं.... अंतर्मुखी लोगों में कम बोलना एवं किसी बात को समझने, सुनने की बहुत अद्भुत कला इनके ज्ञान और समझने की क्षमता को बढ़ाता है। यही कारण है कि जब इन्हें किसी को कोई बात समझानी हो, तो ये बड़े सटीक और सरल तरीके से समझा पाते हैं।

    • पति जब अंतर्मुखी हो तो क्या करें**…

पति-पत्नी आपस में कुछ इस तरह सामन्जय बैठा ले, तो जीवन बिना परेशानी के गुजर-बसर हो सकता है की… ■ पति गम्भीर प्रवृति का हो, तो उन्हें किसी के मरने पर, उठावनी जैसे गमगीन या दुख कार्यों के अलावा सत्संग, भजन, कीर्तन, भागवत कथा आदि में जाए और ■ पत्नी को मीटिंग, शादी-विवाह, मङ्गल कार्य, किट्टी पार्टी, होटल, क्लब, महिला संगीत आदि आनंददायक कार्यक्रम का लुफ्त उठाना चाहिए।


परिचय[संपादित करें]

व्यक्ति के व्यक्तित्व का अध्ययन करने के लिए मनोवैज्ञानिक सदियों से प्रयत्न करते रहे हैं। नये-नये सिद्धांतों की खोज और व्यक्ति को विभिन्न वर्गों में रखकर व्यक्तित्व का अध्ययन करने का प्रयत्न किया गया। ईसा के चार सौ वर्ष पूर्व प्रसिद्ध दार्शनिक व चिकित्सक हिप्पोक्रेट्स ने कायरस (humours) के आधार पर व्यक्ति के व्यक्तित्व को चार भागों में बांटा। अपने अध्ययन में उसने मनुष्य में चार रसों की उपस्थिति मानी, ये चार रस हैं-

1. रक्त, 2. कृष्ण पित्त, 3. पीत पित्त और 4. कफ।

हिप्पोक्रेट्स के अनुसार इन चारों में से एक काय रस की व्यक्ति में प्रधानता होती है और उसके अनुसार उसकी चित्त-वृत्ति होती है। इसी तरह आयुर्वेद में भी वात, कफ, पित्त के आधार पर व्यक्ति के चित्त की प्रकृति का वर्णन किया गया है। भगवद्गीता में भी तीन गुणों सत्, रज, तम के आधार पर व्यक्ति के व्यक्तित्व का वर्गीकरण किया गया है। इस शताब्दी के मनोवैज्ञानिकों ने भी विभिन्न सिद्धांतों द्वारा व्यक्तित्व का अध्ययन करने का प्रयत्न किया।

  • जर्मन मनोवैज्ञानिक क्रेत्समर (1925) ने शारीरिक रचना के प्रकारों के आधार पर व्यक्तित्व का वर्गीकरण किया। उसने व्यक्तियों को चार भागों में वर्गीकृत किया।
  • इसी तरह अमेरिकन चिकित्सक विलियम शेल्डन (1942) ने व्यक्तियों को तीन वर्गों में वर्गीकृत किया है- एन्डोमॉर्फी अथवा स्थूलकाय, मीजोमॉर्फी या मध्यकाय, एक्टोमॉर्फी या लम्बकाय।
  • युंग तथा अन्य प्रमुख मनोवैज्ञानिकों ने व्यक्तियों के व्यक्तित्व को दो भागों में बांटा- बहिर्मुखी और अंतर्मुखी।
  • इसी तरह से कई अन्य मनोवैज्ञानिकों ने व्यक्तित्व को तीन भागों में बांटा- अंतर्मुखी, बहिर्मुखी और उभयमुखी।
  • आइजैनक (1970, 1975) ने व्यक्तित्व को चार भागों में बांटा- अंतर्मुखी, बहिर्मुखी, स्थिर और अस्थिर।
  • आलपोर्ट (1966) ने शीलगुणों (ट्रेट्स) के आधार पर व्यक्तित्व का वर्गीकरण किया।

व्यक्तित्व का सम्पूर्ण अध्ययन करने के लिए कई सिद्धांतों का प्रतिपादन हुआ। इन सिद्धांतों को पांच वर्गों में रखा जा सकता है-

  • 1. प्रकार और गुणशील सिद्धांत (type and trait theory),
  • 2. मनोगत्यात्मक सिद्धांत (Psychodynamic theories),
  • 3. मानवीय सिद्धांत (Humanistic theories),
  • 4. अधिगम सिद्धांत (Learning theories),
  • 5. ज्ञानात्मक सिद्धांत (cognitive theories)।

उपरोक्त पांच प्रकार के सिद्धांतों से व्यक्ति के व्यक्तित्व का वर्गीकरण और अध्ययन किया जा सकता है।

युंग का व्यक्तित्व प्ररूप[संपादित करें]

युंग ने व्यक्तिव के 3 प्रकार बताये हैं। 1.अंतर्मुखी 2.बहिर्मुखी 3.उभयमुखी*

  • युंग के इस वर्गीकरण में नामेन-याकोर ने अंतर्मुखी तथा बहिर्मुखी के मिश्रित सामान्य गुणों को शामिल करते हुए उभयमुखी प्रकार दिया।