व्यंग्य

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व्यंग्य साहित्य की एक विधा है जिसमें उपहास, मज़ाक (लुत्फ ) और इसी क्रम में आलोचना का प्रभाव रहता है। यूरोप में डिवाइन कॉमेडी, दांते की लैटिन में लिखी किताब को मध्यकालीन व्यंग्य का महत्वपूर्ण कार्य माना जाता है, जिसमें तत्कालीन व्यवस्था का मज़ाक उड़ाया गया था। व्यंग को मुहावरे मे व्यंग्यबाण कहा गया है।

हिन्दी में हरिशंकर परसाई और श्रीलाल शुक्ल इस विधा के प्रमुख हस्ताक्षर हैं।

युगीन समस्याओ पर व्यंग्य करने की प्रवृति प्रेमचंद में भी बहुत मिलती है। इन्होंने अपनी कहानियों और उपन्यासो में आम आदमी और कृषक वर्ग की दैनंदिन कठिनाइयों पर करारा व्यंग्य किया है। प्रेमचंद के बाद के रचनाकारों में निराला साहित्य में इसे देखा जा सकता है। इनकी 'कुकुरमुत्ता' आदि रचनाओ में व्यंग्य की अभिव्यक्ति विद्रुपता फैलाने वाले समाज के खिलाफ चुनौती के रुप में हुई है।

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