वेदवती

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वेदवती देवी लक्ष्मी कि एक अवतार थी। सीता माता देवी वेदवती का ही पुनर्जन्म था। वेदवती का प्रमुखतः उल्लेख वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड में मिलता है.वह बृहस्पति के पुत्र ब्रह्मर्षि कुशध्वज की पुत्री थी. रूप, शील, तप में श्रेष्ठ तापसी वेदवती अपने पिता के मनोरथ को सिद्ध करने हेतु भगवान श्रीविष्णु को पति रूप में पाने के लिए तप कर रही थी. दिग्पालों को जीतकर मार्ग में आते समय रावण ने उन्हें देखा और उनसे विवाह हेतु प्रस्ताव किया. मना करने पर उसने बलपूर्वक दुर्व्यवहार करके उनके शील भंग की कुचेष्टा की. अपने व्रत व शील के रक्षण हेतु वेदवती ने जीवित ही अग्नि में प्रवेश करके अपने प्राण दे दिया. अगले जन्म में वही सीता जी के रूप में उत्पन्न हुईं. स्रोत : वाल्मीकि रामायण

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