वीर

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विभाव, अनुभाव और संचारी भाव के संयोग से पूर्णतया को प्राप्त होने वाले उत्साह नामक स्थायी से वीर रस की निष्पति होती हैं। उदाहरण-:मै सत्य कहता हूं सके सके! सुकुमार मत मानो मुझे।यमराज से भी युद्ध में प्रस्तुत सदा मानो मुझे। है और की बात ही क्या गर्व मै करता नहीं।मामा तथा निज तात से समर में डरता नहीं। By Anmol Dwivedi