विश्वनाथ नायक

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मदुरै नायक राजवंश का राजा। वह मधुरै के नायक राजवंश का संस्थापक है। विश्वनाथ नायक और आर्यनाथा मुडलियार ने सेना का नेतृत्व किया। दक्षिण भारत के तिरुनलवेली में उन्होने अधिकार प्राप्त किया। विश्वनाथ नायक के बाद उनका बेटा कृष्णप्पा और विश्वनाथ का मंत्री आर्यप्पा मधुरै राजवंश को और आगे लेकर गया। पांडियन राज्य के अधिकतर प्रेदेशों में कृष्णप्पा का शासन चलने लगा।

वृत्तान्त[संपादित करें]

विश्वनाथ नायक का पिता नगमा नायक था जो विजयनागरा साम्राज्य के कृष्णदेवराया का सफल सेनापति रह चुके है। १६ वीं शताब्धी में छोले के राजा ने मधुरै पर आक्रमण किया और पाण्ड्या राजा चच्न्द्रशेखरा पान्ड्यन को सिंहासन से निकाल दिया था। पाण्ड्या राजा को विजयनागरा राजवंश ने सुरक्षा दिया था। नगमा नायक ने छोले के राजा को मधुरै लेकर गया, लेकिन उसने संबंध तोड थी और सिंहासन हड़प लिया। विजयनगर सम्राट ने मांग की कि कोई व्यक्ति इस समस्या को सुलझाले। तब नगमा का बेटा विश्वनाथ एक विशाल सेना के साथ अपने पिता को सिंहासन को निकालकर उन्हें राजा के समक्ष लेकर गया। राजा ने उनकी निष्ठा को देखकर उन्हें मधुरै का राज्यपाल बना दिया।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

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  1. http://tnpsctutorial.blogspot.com/2013/09/the-nayak-rule.html