"प्रशीतन" के अवतरणों में अंतर

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प्रशीतन व्यवस्था निम्नलिखित उपायों द्वारा प्राप्त की जा सकती है :
 
*1. पानी या बर्फ में [[साधारण नमक|नमक]] के संयोग से,
*2. कम दाब पर द्रव को उबाल कर,
*3. बाह्य कार्य करनेवाली किसी गैस के [[रुद्धोष्म प्रसार]] (adiabatic) द्वारा,
*4. [[जूल-टॉमसन प्रभाव|जूल-टामसन प्रभाव]] के प्रयोग से
*5. [[पेल्टियर प्रभाव]] से उत्पन्न शीतलीभव की क्रिया द्वारा,
*6. [[अधिशोषण]] की ऊष्मा (heat of absorption) का उपयोग करके।
पानी या बर्फ में नमक के संयोग से बर्फ के टुकड़ों से सामान्यतया पानी चिपका रहता है। जब उनके साथ नमक मिलाया जाता है तब वह उस पानी में गल जाता है और बर्फ पिघलती है। विलयन ऊष्मा (heat of solution) और बर्फ गलने की गुप्त ऊष्मा उसी मिश्रण से प्राप्त होती हैं तथा फलस्वरूप मिश्रण का ताप का यह पतन एक निश्चित सीमा से अधिक नहीं हो सकता। जब मिश्रण का ताप लगभग -21.20 सें. तक पहुँच जाता है, तब उसका पतन रुक जाता है और अधिक नमक उस विलयन में डालने से कोई परिवर्तन नहीं होता। इस ताप को गलनक्रांतिक ताप (Eutectic temperature) कहते हैं। इस ताप पर विलयन के आ जाने के बाद उसमें अधिक नमक नहीं घुल सकता। नीचे कुछ लवणों के, जो पानी में घुल सकते हैं, नाम और उनके संगत गलन क्रांतिक ताप के मान दिए जा रहे हैं :
 
लवण मिश्रण के 100 ग्राम में मिश्रित गलन [[क्रांतिक बिन्दु|क्रांतिक ताप]]
अजल लवण की मात्रा (डिग्री सेंटिग्रेड)
85,927

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