विनोद कुमार शुक्ल

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हिन्दी लेखक

विनोद कुमार शुक्ल

विनोद कुमार शुक्ल हिंदी के प्रसिद्ध कवि और उपन्यासकार हैं ! 1 जनवरी 1937 को भारत के एक राज्य छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव में जन्मे शुक्ल ने प्राध्यापन को रोज़गार के रूप में चुनकर पूरा ध्यान साहित्य सृजन में लगाया ! उनकी एकदम भिन्न साहित्यिक शैली ने परिपाटी को तोड़ते हुए ताज़ा झोकें की तरह पाठकों को प्रभावित किया, जिसको 'जादुई-यथार्थ' के आसपास की शैली के रूप में महसूस किया जा सकता है ! उनका पहला कविता संग्रह 1971 में 'लगभग जय हिन्द' नाम से प्रकाशित हुआ ! 1979 में 'नौकर की कमीज़' नाम से उनका उपन्यास आया जिस पर फ़िल्मकार मणिकौल ने इसी से नाम से फिल्म भी बनाई ! कई सम्मानों से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल को उपन्यास 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' के लिए वर्ष 1999 का 'साहित्य अकादमी' पुरस्कार प्राप्त हो चुका है । विनोद कुमार शुक्ल हिंदी कविता के वृहत्तर परिदृश्य में अपनी विशिष्ट भाषिक बनावट और संवेदनात्मक गहराई के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने समकालीन हिंदी कविता को अपने मौलिक कृतित्व से सम्पन्नतर बनाया है और इसके लिए वे पूरे भारतीय काव्य परिदृश्य में अलग से पहचाने जाते हैं।

वे कवि होने के साथ-साथ शीर्षस्थ कथाकार भी हैं। उनके उपन्यासों ने हिंदी में पहली बार एक मौलिक भारतीय उपन्यास की संभावना को राह दी है। उन्होंने एक साथ लोकआख्यान और आधुनिक मनुष्य की अस्तित्वमूलक जटिल आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति को समाविष्ट कर एक नये कथा-ढांचे का आविष्कार किया है। अपने उपन्यासों के माध्यम से उन्होंने हमारे दैनंदिन जीवन की कथा-समृद्धि को अद्भुत कौशल के साथ उभारा है। मध्यवर्गीय जीवन की बहुविध बारीकियों को समाये उनके विलक्षण चरित्रों का भारतीय कथा-सृष्टि में समृद्धिकारी योगदान है। वे अपनी पीढ़ी के ऐसे अकेले लेखक हैं, जिनके लेखन ने एक नयी तरह की आलोचना दृष्टि को आविष्कृत करने की प्रेरणा दी है। आज वे सर्वाधिक चर्चित लेखक हैं। अपनी विशिष्ट भाषिक बनावट, संवेदनात्मक गहराई, उत्कृष्ट सृजनशीलता से श्री शुक्ल ने भारतीय वैश्विक साहित्य को अद्वितीय रूप से समृद्ध किया है।

विनोद कुमार शुक्ल की प्रमुख कृतियाँछ-

           

कविता संग्रह-

 ·      ' लगभग जयहिंद ' वर्ष 1971.

·      ' वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह' वर्ष 1981.

·      ' सब कुछ होना बचा रहेगा ' वर्ष 1992.

·      ' अतिरिक्त नहीं ' वर्ष 2000.

·      ' कविता से लंबी कविता ' वर्ष 2001.

·      ' आकाश धरती को खटखटाता है ' वर्ष 2006.

·      ' पचास कविताएँ' वर्ष 2011

·      ' कभी के बाद अभी ' वर्ष 2012.

·      ' कवि ने कहा ' -चुनी हुई कविताएँ वर्ष 2012.

·      ' प्रतिनिधि कविताएँ ' वर्ष 2013.

 

उपन्यास-

·      ' नौकर की कमीज़ ' वर्ष 1979.

·      ' खिलेगा तो देखेंगे ' वर्ष 1996.

·      ' दीवार में एक खिड़की रहती थी ' वर्ष 1997.

·      ' हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़ ' वर्ष 2011.

·      ' यासि रासा त ' वर्ष 2017.

 

कहानी संग्रह-

·      ' पेड़ पर कमरा ' वर्ष 1988.

·      ' महाविद्यालय ' वर्ष 1996.

 

अनुदित कृतियाँ-

·      उपन्यास ' नौकर की कमीज़ ' का फ्रेंच, अंग्रेजी सहित प्रमुख भारतीय भाषाओं में अनुवाद।

·      उपन्यास ' दीवार में एक खिड़की रहती थी ' का अंग्रेजी सहित प्रमुख भारतीय भाषाओं में अनुवाद।

·      उपन्यास ' खिलेगा तो देखेंगे ' का अंग्रेजी में अनुवाद।

·      ' हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़ ' का अंग्रेजी में अनुवाद। (प्रकाशनाधीन)

·      ' पेड़ पर कमरा ' कहानी संग्रह का मराठी, अंग्रेजी में अनुवाद।

·      कविताओं का एक संग्रह इतालवी में।  स्वीडिश, जर्मन, अरबी, अंग्रेजी सहित प्रमुख भारतीय भाषाओं में कविताओं के अनुवाद।

प्रमुख सम्मान :     

·      ' गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप ' (म.प्र. शासन)

·      ' रज़ा पुरस्कार ' (मध्यप्रदेश कला परिषद)

·      ' शिखर सम्मान ' (म.प्र. शासन)

·      ' राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान ' (म.प्र. शासन)

·      ' दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान' (मोदी फाउंडेशन)

·      ' साहित्य अकादमी पुरस्कार', (भारत सरकार)

·      ' हिन्दी गौरव सम्मान' (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, उ.प्र. शासन)           

फिल्म/नाटक   :     

·      उपन्यास ' नौकर की कमीज़ ' एवं कहानी 'बोझ' पर विख्यात फिल्मकार मणिकौल द्वार फिल्म का निर्माण वर्ष 1999. फिल्म 'केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह ' में पुरस्कृत।

·      कहानियाँ 'आदमी की औरत' एवं 'पेड़ पर कमरा' पर राष्ट्रीय फिल्म इंस्टीट्यूट, पूना द्वारा अमित दत्ता के निर्देशन में फिल्म का निर्माण। फिल्म वेनिस अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह 2009 में ‘स्पेशल मेनशन अवार्ड’ से सम्मानित।

·      उपन्यास ' दीवार में एक खिड़की रहती थी' पर प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक मोहन महर्षि सहित अन्य रचनाओं पर निर्देशकों द्वारा नाट्य मंचन।

अन्य        :     

·      ' निराला सृजन पीठ ', भारत भवन, भोपाल में रहे।

·      साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सदस्य रहे।

·      वर्ष अप्रैल 2013 से अप्रैल 2014 में वे ‘अतिथि लेखक (राइटर इन   रेसीडेंस), महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र,.

·      तक्षशिला शैक्षणिक संस्थान, नई दिल्ली की तक्षशिला बाल साहित्य   सृजन पीठ के अंतर्गत इन दिनों निवास में रहकर ही बच्चों के लिए साहित्य लेखन का कार्य कर रहे हैं।

 
 

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