वार्ता:मूलभूत अनुसंधान

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संसार की संपूर्ण रचनाएं वस्तुत:शब्दों में अंकित है । शब्द ही समस्त काल खण्ड का साक्ष्य है । शब्दों की संपूर्णता के खोज को ज्ञान कहते है । शब्द रचना से पूर्व मानव रचित कुछ भी नहीं ।मानवता की संपूर्ण खोज शब्दों के सम्पूर्ण खोज पर आधारित है। शब्द कोष के विलुप्त हो जाने पर वर्तमान( ०) पर निहित सम भाग पर स्थित होता है वर्तमान में बहुप्रचारित भाषाओं में मुख्य रूप से (अंग्रेजी ) ग्रिक माइथोलॉजी ज़ीरो डिविडेंड शैली पर आधारित अप्राकृतिक क्रिया का एक भाग मात्र है। पाषाण युग में मानव ने शब्द बोध और कृत्रिम अप्राकृतिक रचनाओं को स्वीकार किया । साक्ष्य प्रस्तुति वाक्य (शब्द ही वेद है । वेद ही शब्द है । शब्द रहित वेद O शून्य मा त्रा संबोधित करते हैं ०हिंदी भाषा के समस्त ३६ शब्दों की रचना में प्रथम आकार कौन सा है ।यीः कठितः संपुर्णनम मनावाह: सर्वे भ्राणि भवन्तु:

Save Our Planet Earth[संपादित करें]

Is the every brighten objects in our Sky not Stars.May be that blighting a Dangerous stroid coming to touch our Heaven birth place Earth.. Dharmendra Singh (Inventor) (वार्ता) 18:27, 4 नवम्बर 2019 (UTC)