वर्णवृक्ष

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वर्णवृक्ष विभिन्न वर्णों की उत्पत्ति का दर्शन है। सभी वर्णों की उत्पत्ति ओंकार से हुई है। अकार से सारे स्वर, हकार से सारे व्यंजन, बिन्दु के ारोह के बाद अहंकार से सारी सृष्टि का उद्भव हुआ है।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. भटनागर, सुरेन्द्र. वर्णम् - संस्कृत भाषा का वर्ण विज्ञान. अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय, भोपाल.