लालटेन

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रेल को संकेत करने हेतु प्रयुक्त लालटेन

लालटेन (अंग्रेजी:lantern) प्रकाश का सुवाह्य स्रोत है जिसे हाथ से उठाकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है। प्रकाश स्रोत के अतिरिक्त इनका उपयोग संकेत देने (सिगनलिंग) के लिये भी किया जा सकता है। पुराने दिनों में यह टार्च की भांति भी प्रयोग किया जाता होगा। कुछ लालतेनों का प्रयोग सजावट के लिये भी किया जाता है। लालटेन शब्द अंग्रेज़ी के लॅन्टर्न शब्द का अपभ्रंश है। जिस प्रकार अनेक खोज युद्ध में सेना की आवश्यकता के लिए हुई उसी तरह लालटेन भी उन खोजों में से एक है। इसलिए मुख्य रूप से लालटेन का रंग हरा होता है। केरोसिन ऑयल जिसे मिट्टी का तेल या दक्षिण भारत में घासलेट भी कहते है, ही इसके आविष्कार का कारण बना। सेना को रात में रौशनी के लिए एक ऐसे उपकरण की आवश्यकता थी जिसकी आग तेज हवा और बारिश में भी ना बुझे। लालाटेन भारत में घर-घर में पाये जाने वाला एक अनिवार्य प्रकाश उपकरण बन गया जो आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में पाया जाता है। लालटेन पर कहावतें मशहुर है-

  • इसकी तो लालटेन बुझ गयी
  • आँखें है या लालटेन

सजावटी लालटेन (कंदील) भी अनेक रूपों में मौजूद हैं। कुछ इमारतों से लटकाने के लिए है, काग़ज़ लालटेन दुनिया भर में चलन में है विशेषकर जापान और चीन में इनका उपयोग बहुत होता है। लालटेन को परिवहन के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। रेलगाड़ी के सिग्नल देने में इसकी मुख्य भूमिका है। केरोसिन लालटेन के कुछ ख़तरे भी हैं। ज्वलनशील ईंधन विषाक्त गैसों का उत्सर्जन लालटेन का मुख्य दुर्गुण है। कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता जीवन और पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक है। कुछ लालटेन बैटरी संचालित होती हैं। वे केरोसिन लालटेन की तुलना में आसानी से उपयोग में आने वाली और अपेक्षाकृत अधिक टिकाऊ हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]