लागत लेखांकन

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लेखांकन
मुख्य संकल्पनाएँ
लेखांकक · लेखांकन अवधि · पुस्तपालन · Cash and accrual basis · Cash flow management · Chart of accounts · Constant Purchasing Power Accounting · Cost of goods sold · Credit terms · Debits and credits · Double-entry system · Fair value accounting · FIFO & LIFO · GAAP / IFRS · General ledger · Goodwill · Historical cost · Matching principle · Revenue recognition · Trial balance
लेखांकन के क्षेत्र
लागत · वित्तीय · न्यायालयिक · Fund · प्रबन्ध
वित्तीय विवरण
Statement of Financial Position · Statement of cash flows · Statement of changes in equity · Statement of comprehensive income · Notes · MD&A · XBRL
लेखापरीक्षा
लेखापरीक्षक की रिपोर्ट · वित्तीय लेखापरीक्षा · GAAS / ISA · आन्तरिक लेखापरीक्षा · Sarbanes–Oxley Act
लेखांकन योग्यताएँ
CA · CPA · CCA · CGA · CMA · CAT

विभिन्न वैकल्पिक कार्यविधियों के एकत्रीकरण, विश्लेषण, मूल्यांकन एवं संक्षेपण को लागत लेखांकन (Cost accounting) कहते हैं। इसका लक्ष्य प्रबन्धन को यह बताना है कि लागत की दक्षता के आधार पर कौन सा रास्ता सबसे उपयुक्त है।

परिभाषा

आर॰ एन‌‍‍॰ कार्टर के अनुसार "वस्तु के निर्माण या किसी उपकरण में लगे माल का या श्रम का लेखा रखने की प्रणाली को लागत लेखांकन कहते हैं।"

परिचय[संपादित करें]

वर्तमान में लागत लेखांकन इतना महत्वपूर्ण हो गया है कि इस प्रतिस्पर्धा के युग में विकास करना संभव नहीं है। प्रत्येक उत्पादनकर्ता को लागत लेखांकन के सम्बन्ध में ज्ञान होना चाहिए तथा उसे व्यवस्थित रूप से लागत लेखे रखने चाहिए ताकि उसका उत्तरदायित्व बना रहे, जिसके फलस्वरूप वह प्रतिस्पर्धा के युग में अपने द्वारा उत्पादित माल पर अधिक से अधिक लाभ कमा सके।

लागतों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिये वित्तीय लेखांकन पर्याप्त नहीं है। वर्तमान समय में वर्ष के अन्त में केवल लाभ-हानि खाता बनाकर व्यापार का लाभ ज्ञात कर लेना तथा चिट्ठा बनाकर व्यापार की आर्थिक स्थिति का पता लगा लेना ही पर्याप्त नहीं है। वित्तीय लेखांकन उत्पादन लागत से संबन्धित स्थिति को प्रस्तुत करने में असमर्थ है। वित्तीय लेखांकन प्रबन्धकों को उत्पादन एवं विक्रय संबन्धी नीतियों का निर्धारण करने में कोई सहायता प्रदान नहीं कर सकता। वित्तीय लेखांकन की इन्हीं सीमाओं को दूर करने के लिये लेखांकन की एक नयी शाखा लागत लेखांकन का जन्म हुआ।

लागत लेखा पद्धति पूर्ण लेखांकन पद्धति का एक भाग मात्र है। इस पद्धति की स्थापना लागत सम्बन्धी सूचनाएँ प्राप्त करने के लिये की जाती है। इसकी सहायता से उत्पाद सेवाओं व विभिन्न प्रक्रियाओं की लागत को नियंत्रित किया जा सकता है।

लागत लेखा विभाग से प्राप्त सूचनाओं का उपयोग सभी स्तरों पर व सभी विभागों द्वारा किया जा सकता है। लागत लेखा विभाग से प्राप्त ये सूचनाएँ अन्य विभागों के कार्य प्रभावी ढंग से निष्पादित करने में सहायता प्रदान करती हैं। प्रबन्धकों को निर्नय लेने में सहायता हेतु लागत सूचनाओं का सही प्रारूप में प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है। ये सूचनाएँ निर्णयन के उद्देश्यों को ध्यान में रखकर उचित प्रारूप में प्रस्तुत की जाती हैं। ये सूचनाएँ प्रासंगिक हों तथा तथा समय पर प्रदान की जा सकें, इसके लिये अच्छी लागत लेखा पद्धति की स्थापना की जाती है।

लेखांकन के उद्देश्य[संपादित करें]

1) लागत ज्ञात करना

2) लागत पर नियंत्रण करना

3) विक्रय मूल्य का निर्धारण करना

4) लाभदायकता का निर्धारण करना

5) सूचनाएं उपलब्ध करवाना

6) प्रबंध को सहायता

भारत में लागत लेखांकन का उद्गम[संपादित करें]

लागत लेखांकन के बढ़ते हुए महत्व को ध्यान में रखते हुए सन् 1944 में इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एण्ड वर्क्स अकाउण्ट्स ऑफ इण्डिया (ICWAI) की स्थापना की गयी।