लक्ष्मणरेखा

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

रामायण के एक प्रसिद्ध प्रसंग के अनुसार वनवास के समय सीता के आग्रह के कारण राम मायावी स्वर्ण म्रग के आखेट हेतु उसके पीछे गये। थोड़ी देर में सहायता के लिए राम की पुकार सुनाई दी, तो सीता ने लक्ष्मण से जाने को कहा। लक्ष्मण ने बहुत समझाया कि यह सब किसी की माया है, पर सीता न मानी। तब विवश होकर जाते हुए लक्ष्मण ने कुटी के चारों ओर अपने धनुष से एक रेखा खींच दी कि किसी भी दशा में इस रेखा से बाहर न आना। तपस्वी के वेश में आए रावण के झाँसे में आकर सीता ने लक्ष्मण की खींची हुई रेखा से बाहर पैर रखा ही था कि रावण उसका अपहरण कर ले गया। उस रेखा से भीतर रावण सीता का कुछ नहीं बिगाड़ सकता था। तभी से आज तक लक्ष्मणरेखा नामक उक्ति इस आशय से प्रयुक्त होती है कि, किसी भी मामले में निश्चित हद को पार नही करना है, वरना बहुत हानि उठानी होगी।