रैखिक कण त्वरक

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जापान के केक (KEK) नामक कण-त्वरक सुविधा में प्रयुक्त एक रैखिक कण त्वरक

वे कण त्वरक रैखिक कण त्वरक (linear particle accelerator) या लिनैक (linac) कहलाते हैं जो आवेशित कणों को सीधी रेखा में (बिना मोड़े) त्वरित करते हैं। टीवी (पिक्चर ट्यूब वाली टीवी) सरलतम रैखिक त्वरक है जो ट्यूब के पिछले सिरे पर स्थित कैथोड से उत्सर्जित एलेक्ट्रॉनों की वेग वृद्धि करके अधिक तेजी से पर्दे पर टकराने में मदद करता है। रैखिक कण त्वरक का आविष्कार सन् १९२८ में रॉल्फ विडेरो (Rolf Widerøe) ने किया था।

उपयोग[संपादित करें]

रेडियोथेरैपी के लिये प्रयुक्त एक रैखिक त्वरक

रैखिक त्वरकों के बहुत से उपयोग हैं।

  • इनका उपयोग एक्स-किरणें उत्पन्न करने में होता है;
  • ये उच्च उर्जा वाले कण त्वरकों के इंजेक्टर (अर्थात, आरम्भिक चरण) के रूप में उपयोग में लाये जाते हैं;
  • इनका उपयोग खाद्य सामग्री (फल, बीज आदि) पर विकिरण डालकर उनको नष्ट होने से बचाने या उनके क्षरण की गति धीमी करने में होता है।
  • उप-परमाणवीय कणों के गुण्धर्म की जांच करने के लिये भी इनका उपयोग किया जाता है।

रैखिक त्वरक के प्रमुख अवयव[संपादित करें]

रैखिक त्वरक का योजनामूलक (स्कीमैटिक) चित्र
  • आवेशित कण (जैसे प्रोटॉन, एच माइनस) का कोई स्रोत,
  • आवेशित कणों को आरम्भिक उर्जा देने के लिये एक उच्च वोल्टता का स्रोत,
  • एक निर्वातित खोखली पाइप, जिसमें आवेशित कण उर्जा में वृद्धि करते हुए आगे गति करते हैं,
  • इस पाइप में कणों को उर्जा प्रदान करने वाली व्यवस्था,
  • कणों को फोकस करने (अर्थात फैलने से रोककर पतली किरणपुंज के रूप में बनाये रखने) के लिये चुम्बकीय लेंस या वैद्युत लेंस

उदाहरण के लिये, 1 GeV की प्रोटॉण किरण-पुंज प्रदान करने वाले रैखिक त्वरक की संरचना कुछ इस प्रकार की हो सकती है-

इन्जेक्टर ---> RFQ ---> DTL ---> CCDTL ---> CCL
जिसमें RFQ 2.5 MeV तक त्वरित करे ; DTL 20 MeV तक ; CCDTL 90 MeV तक ; और अन्ततः CCL 1 GeV तक।

रैखिक त्वरण का सिद्धान्त[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

विश्व का सबसे लम्बा (3 km) रैखिक त्वरक SLAC है जो कैलिफोर्निया में स्थित है।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]