रंजक

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नील रंजक की रासायनिक संरचना, जिससे जींस को उसका चिरपरिचित रंग प्राप्त होता है। एक बार पौधों से निकाले जाने के बाद, नील रंजक को औद्योगिक रूप से संश्लेषित किया जाता है।[1]
कोनर प्रेयरी जीवित इतिहास संग्रहालय में प्रारंभिक अमेरिकी परंपरा में रंगे जाने के बाद सूखते धागे।

रंजक , एक रंगीन द्रव्य होता है जिसमें उस अंत:स्तर के प्रति आकर्षण होता है जिस पर उसे लगाया जाता है। रंगाई के लिए आम तौर पर रंजको का एक जलीय घोल बनाया जाता है, और किसी तंतु पर रंग की गहराई या तेजी पाने के लिए उसमें एक रंगबंधक मिलाने की आवश्यकता भी हो सकती है।

रंजक और वर्णक दोनों ही रंगीन होते हैं, क्योंकि वे दृश्य प्रकाश की केवल कुछ तरंग दैर्ध्य को अवशोषित करते हैं। रंजक आमतौर पर पानी में घुलनशील होते हैं जबकि वर्णक अघुलनशील होते हैं। कुछ रंजकों में नमक मिलाकर एक अघुलनशील लाक्षक वर्णक प्राप्त किया जा सकता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. “Indigo and Indigo Colorants”। Ullmann's Encyclopedia of Industrial Chemistry। (2004)। Weinheim: Wiley-VCH। DOI:10.1002/14356007.a14_149.pub2.