यमी

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यमी सूर्य की कन्या, जिसकी माता का नाम संज्ञा था। इसके सगे भाई यम अथवा यमराज हैं।

यम तथा यमी एक साथ जुड़वाँ जन्मे थे और यमी का दूसरा नाम यमुना भी है। इन भाई-बहन की कथा विष्णुपुराण (३-२-४) एवं मार्कण्डेय पुराण (७४-४) पुराणों में सविस्तार वर्णित है। ऋग्वेद के अनुसार विवस्वान् के आश्वद्वय यम तथा यमी सरण्यु के गर्भ से हुए थे (१०। १४)। विवस्वान की कन्या यमी ने इंद्र के आदेश से शक्तिपुत्र पराशर के कल्याणार्थ दासराज के घर सत्यवती नाम से जन्म लिया (शिवपुराण)। इनकी कथा कूर्मपुराण में भी पाई जाती है।

यम द्वितीया के संबंध में एक दंतकथा है कि इसी दिन यम अपनी बहन यमी के यहाँ अतिथि होकर गए तो उन्होंने अपने भाई को एक विशेष पकवान (अवध में 'फरा') बनाकर खिलाया। यमराज इसे खाकर अपनी बहन पर परम प्रसन्न हुए और चलते समय उनसे वरदान माँगने को कहा। यमुना ने अंत में यही वर माँगा कि जो भी भाई बहन यमद्वितीया के दिन मेरे तट पर स्नान कर यही पकवान बनाकर खाएँ वे यमराज की यातना से मुक्त रहें।[1]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. हिंदी विश्वकोश, खण्ड-9, नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी, संस्करण-1967, पृष्ठ-466-467 से पूरा लेख प्रायः यथावत् उद्धृत है।