मौलवी लियाक़त अली
धार्मिक नेता और सिपाही विद्रोह में कार्यकर्ता | |||
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| जन्म तिथि | 5 अक्टूबर 1817 प्रयागराज | ||
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| मृत्यु तिथि | 17 मई 1892 यांगून | ||
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मौलवी लियाकत अली (पूरा नाम: काजी सैयद मौलवी लियाकत अली[1])(1817-1892) एक मुस्लिम धार्मिक नेता थे, जिनका संबंध वर्तमान भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में इलाहाबाद के निकट स्थित महगाँव (वर्तमान: कौशांबी ज़िले) से था।
1857 की भारतीय क्रांति में मौलवी लियाकत अली ने प्रयागराज में विद्रोह का नेतृत्व किया और खुसरोबाग में झंडा फहराया। कर्नल नील के हमले के बाद वे बच निकले। बागी घोषित लियाकत पर अंग्रेजों ने 5000 का इनाम रखा। 1871 में गिरफ्तार कर उन्हें अण्डमान की सेल्यूलर जेल की सजा दी गई।[2]
जीवनी
[संपादित करें]मौलवी लियाकत अली का जन्म 5 अक्टूबर 1817 को हुआ। इसके पिता सैयद अली मेहर और माता अमीना बीवी था। इसके चाचा सैयद मेजर दायम अली जो विद्रोह के पूर्व तक ब्रिटिश सेना में थे। 1857 के भारतीय विद्रोह होने पर इसके चाचा ने इसके नेतृत्व में काम किया। इसके चाचा का विवाह चंचलबाई से हुआ जो लक्ष्मीबाई के पिता मोरोपन्त काम्बे की बहन थी। इसी कारण से ये लक्ष्मीबाई को छोटी बहन कहते थे।[1]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- 1 2 Sinha, Atul Kumar (2004). Perspectives in Indian History. Anamika Publishers & Distributors. ISBN 978-81-7975-076-6.
- ↑ Bharatvarsh, TV9 (2022-06-21). "Azadi Ka Amrit Mahotsav :1857 में 11 दिन आजाद रहा था प्रयागराज, कर्नल नील ने बनारस से आकर किया था दोबारा कब्जा, 1930 के बाद फिर उखड़ने लगे थे अंग्रेजों के पैर". TV9 Bharatvarsh. अभिगमन तिथि: 2026-08-11.
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