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मुष्टि

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चार भिन्न दिशाओं से मानव मुष्टि

मुष्टि एक हस्ताकृति होती है जब अंगुलियाँ, करतल पर भीतर की ओर मुड़ी और कठिनतः धृत होती हैं। मुष्टि निर्माण या बांधने का अर्थ है अंगुलियों को करतल के केन्द्र में कठिनतः मोड़ना और फिर अंगुष्ठ को मध्य अंगुलास्थि पर दबाना; इस "बंध" मुष्टि के विपरीत, कोई व्यक्ति तर्जनी के बगल में अंगुष्ठ को धर मुष्टि को "खुला" रखता है। कोई व्यक्ति बंध मुष्टि का प्रयोग किसी सतह पर निम्नांगुलास्थि पर मुष्ट्याघात देता है, या हाथ की एड़ी की कनिष्ठा की तरफ से मारने हेतु करता है; व्यक्ति मध्यमा के मध्य संधि से ठोकने हेतु खुली मुष्टि का प्रयोग करता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]