मुक्ति

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

मुक्ति कर्म के बन्धन से मोक्ष पाने की स्थिति है। यह स्थिति जीवन में ही प्राप्त हो सकती है। मुक्ति निम्न चार प्रकार की होती हैं:

  1. सालोक्य - जीव भगवान के साथ उनके लोक में ही वास करता हैं।
  2. सामीप्य- जीव भगवान के सन्निध्य में रहते कामनाएं भोगता हैं।
  3. सारूप्य - जीव भगवान के साम्य (जैसे चतुर्भुज) रूप लिए इच्छाएं अनुभूत करता हैं।
  4. सायुज्य - भक्त भगवान मे लीन होकर आनंद की अनुभूति करता हैं।