माताप्रसाद गुप्त

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माताप्रसाद गुप्त (१९०९ - १९६९ ई०) हिन्दी भाषा एवं साहित्य के सर्वप्रमुख अनुसन्धानकर्ताओं में से एक तथा पाठालोचन के सर्वमान्य विशेषज्ञ थे।

जीवन-परिचय[संपादित करें]

डॉ॰ माताप्रसाद गुप्त का जन्म 1909 ई० में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के मुँगरा बादशाहपुर में हुआ था। उनकी उच्च शिक्षा प्रयाग विश्वविद्यालय में हुई थी। एम॰ए॰ के अतिरिक्त उन्होंने एल॰एल॰बी॰ की डिग्री भी प्राप्त की थी तथा उन्हें डि॰लिट्॰ की उपाधि से भी अलंकृत किया गया था। प्रयाग विश्वविद्यालय में ही वे अनेक वर्षों तक सहायक प्रोफेसर रहे। फिर राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष तथा हिन्दी विद्यापीठ, आगरा के निदेशक भी रहे।[1]

रचनात्मक परिचय[संपादित करें]

हिन्दी जगत में डाॅ॰ गुप्त की विशेष ख्याति तुलसी-काव्य के विशेषज्ञ तथा पाठालोचन-शास्त्र के प्रमुख पुरस्कर्ता के रूप में रही है। शोधालोचना एवं पाठालोचन के सन्दर्भ में इनका कार्यक्षेत्र काफी व्यापक तथा अग्रणी रहा है।[2] आदिकालीन ग्रंथों के संबंध में भी सम्यक् विवेचन के क्षेत्र में डॉक्टर गुप्त के कार्य को आरंभ से ही महत्वपूर्ण माना गया है।[3] आदिकालीन के साथ-साथ मध्यकालीन कवियों की प्रसिद्ध रचनाओं का संशोधित-संपादित पाठ इन्होंने बड़ी सूझ-बूझ के साथ प्रस्तुत किया है।[1]

डॉ॰ गुप्त ने एक ओर जहाँ पाठालोचन के सिद्धान्तों के अनुसार अनेक ग्रंथों का प्रामाणिक पाठ प्रस्तुत किया, वहीं दूसरी ओर उनमें से अधिकांश ग्रंथों की प्रामाणिक टीका भी लिखी, जिससे शब्द और अर्थ की तारतम्यता सही तथा सुगम रूप में स्पष्ट हो पायी।

शोधालोचना के क्षेत्र में उन्हें अमर कीर्ति प्रदान करने वाली उनकी पुस्तक 'तुलसीदास' है। इस पुस्तक को शोध के क्षेत्र में तो प्रमाणभूत माना ही गया है, आलोचना के संदर्भ में भी डॉ॰ शंभुनाथ सिंह के शब्दों में कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि रामचंद्र शुक्ल के बाद तुलसी के काव्य की सबसे साफ सुथरी और व्यवस्थित आलोचना माताप्रसाद गुप्त की ही है।[4]

डॉ॰ गुप्त को कतिपय प्रसिद्ध विद्वानों द्वारा प्रस्तुत प्रख्यात शोध-प्रबन्धों का शोध-निर्देशक होने का गौरव भी प्राप्त रहा है। सुप्रसिद्ध विद्वान् फादर कामिल बुल्के ने अपना विख्यात शोध ग्रंथ 'रामकथा : उत्पत्ति और विकास' डाॅ॰ गुप्त के निर्देशन में ही प्रस्तुत किया था।[5] इसी प्रकार डॉ॰ पारसनाथ तिवारी संपादित 'कबीर ग्रंथावली' के शोध-निर्देशक भी डाॅ॰ गुप्त ही थे।[6]

प्रकाशित पुस्तकें[संपादित करें]

  1. तुलसी संदर्भ (1935) {शोध निबंधों का संकलन} [विवेक कार्यालय, प्रयाग]
  2. तुलसीदास (1942, संशोधित-परिवर्धित संस्करण-1957) [हिंदी परिषद प्रकाशन, इलाहाबाद विश्वविद्यालय]
  3. हिंदी पुस्तक साहित्य (1945) [हिंदुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद]
  4. रामचरितमानस (1949) {विभिन्न पाठांतरों सहित संशोधित पाठ} [साहित्य कुटीर, प्रयाग]
  5. तुलसी ग्रंथावली, भाग-1, खंड-1 (1950) {विभिन्न पाठांतरों सहित संशोधित पाठ} [हिंदुस्तानी एकेडेमी, प्रयाग]
  6. तुलसी ग्रंथावली, भाग-1, खंड-2, ('रामचरितमानस का पाठ') {विभिन्न पाठ-संपादन संबंधी समस्याओं का विस्तृत विवेचन} [हिंदुस्तानी एकेडमी, प्रयाग]
  7. जायसी ग्रंथावली (1951) {विभिन्न पाठांतर एवं टिप्पणियों सहित संशोधित पाठ} [हिंदुस्तानी एकेडमी, प्रयाग]
  8. बीसल देव रास (सटीक)-1953 {विस्तृत भूमिका, निर्धारित पाठ, पाठांतर, अर्थ एवं टिप्पणियों से युक्त} [हिंदी परिषद, विश्वविद्यालय, प्रयाग]
  9. छिताई वार्ता (सटीक)-1958 [नागरी प्रचारिणी सभा, काशी]
  10. प्रद्युम्न चरित (सटीक)-1960 [जैन साहित्य शोध संस्थान, जयपुर]
  11. मधुमालती (सटीक)-1961 [मित्र प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड, इलाहाबाद]
  12. रासो साहित्य विमर्श (1962) {निबंध संग्रह} [साहित्य भवन प्राइवेट लिमिटेड, इलाहाबाद]
  13. पृथ्वीराज रासो (सटीक)-1963 {विस्तृत भूमिका, निर्धारित पाठ, पाठांतर, अर्थ एवं टिप्पणियों से युक्त} [साहित्य सदन, चिरगांव, झाँसी]
  14. पद्मावत (सटीक)-1963 {पुनर्सम्पादित पाठ एवं व्याख्या तथा विस्तृत शब्दानुक्रमणी} [भारती भंडार, लीडर प्रेस, इलाहाबाद]
  15. चांदायन (सटीक)-1967 {प्रामाणिक प्रकाशन, 35, लाजपत कुंज, सिविल लाइंस, आगरा}
  16. कुतब शतक और उसकी हिंदुई (पाठ-संपादन, टीका एवं भाषा-विवेचन)-1967 {भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशन, वाराणसी}
  17. कबीर ग्रंथावली (सटीक)-1969 [साहित्य भवन प्राइवेट लिमिटेड, जीरो रोड, इलाहाबाद-3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. हिन्दी साहित्य कोश, भाग-2, सं॰-डॉ॰ धीरेन्द्र वर्मा एवं अन्य, ज्ञानमंडल लिमिटेड, वाराणसी, संस्करण-2011, पृष्ठ-442.
  2. हिंदी साहित्य का बृहत् इतिहास, भाग-14, सं॰-हरवंशलाल शर्मा एवं कैलाशचंद्र भाटिया, नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी, संस्करण-1970, पृष्ठ-435.
  3. हिंदी साहित्य का बृहत् इतिहास, भाग-13, सं॰-डॉ॰ लक्ष्मीनारायण सुधांशु, नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी, संस्करण-1965, पृ०-238.
  4. हिंदी साहित्य का बृहत् इतिहास, भाग-13, पूर्ववत्, पृ॰-261.
  5. रामकथा, फादर कामिल बुल्के, हिंदी परिषद प्रकाशन, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, तृतीय संशोधित संस्करण-1971, पृ०-8 (निवेदन).
  6. कबीर ग्रंथावली, माताप्रसाद गुप्त, साहित्य भवन प्राइवेट लिमिटेड, इलाहाबाद, संस्करण-2008, पृ॰-25.