मरणोत्तर स्तंभन

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मरणोत्तर स्तंभन (अंग्रेजी: Death Erection डेथ इरेक्शन), एक शैश्निक स्तंभन है और जिसे तकनीकी भाषा में प्रायापिज़्म कहते हैं, अक्सर उन पुरुषों के शव में देखने में आता है, जिनकी मृत्यु प्राणदंड, विशेष रूप से फांसी के कारण हुई हो।

समीक्षा[संपादित करें]

मरणोत्तर स्तंभन होने का प्रमुख कारण गले पर फंदा कसने के कारण अनुमस्तिष्क पर पड़ा दबाव है। मेरुरज्जु चोटों को प्रायापिज़्म के साथ जोड़कर देखा जाता है। जीवित रोगियों में प्रायापिज़्म का कारण अनुमस्तिष्क या मेरुरज्जु पर लगी चोट से जोड़कर देखा जाता है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि, फांसी से मृत्यु, चाहे वो निष्पादन द्वारा हुई हो या आत्महत्या द्वारा, पुरुषों और महिलाओं दोनों के जननांगों को प्रभावित करती है।

महिलाओं में, ओष्टक की गटकन के कारण योनि से रक्तस्राव हो सकता है। पुरुषों में, शिश्न के कम या अधिक स्तंभन के साथ श्लेष्म, मूत्र, या प्रोस्टैटिक तरल का रिसाव होना एक निरंतर घटने वाली घटना है, जिसकी सम्भावना हर तीन में से एक व्यक्ति को होती है। मृत्यु के अन्य कारणों से भी ये प्रभाव देखा जा सकता है जैसे मस्तिष्क, रक्त वाहिकाओं में घातक गोली लगना, विषाक्तता के द्वारा और न्यायालयिक रूप से कहें तो शवपरीक्षा के दौरान प्रायापिज़्म इस बात का संकेत है की मृत्यु तीव्र और हिंसक ढंग से हुई थी।

सन्दर्भ[संपादित करें]