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मत्स्योद्योग

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दक्षिणपूर्वी अलास्का में साल्मन-पालन केन्द्र

मत्स्योद्योग (अंग्रेजी: Fisheries) मछलियों के पालन, पकड़ने तथा उनसे खाद्य पदार्थ और अन्य उत्पाद बनाने से संबंधित एक उद्योग है। यह अनेक देशों की अर्थव्यवस्था में विशेष स्थान रखता है, विशेषकर समुद्री तटीय क्षेत्रों में। मत्स्योद्योग की गतिविधियाँ स्थान, मछलियों की प्रजाति, पालन और पकड़ने की विधियों, प्रयुक्त उपकरणों तथा नौकाओं के आधार पर भिन्न-भिन्न हो सकती हैं।[1]

परिभाषा और महत्व

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मत्स्योद्योग का आशय मछलियों के पालन-पोषण, पकड़ने, प्रसंस्करण और विपणन से है। यह न केवल खाद्य सुरक्षा में योगदान देता है बल्कि रोजगार के अवसर भी प्रदान करता है। भारत सहित कई देशों में मत्स्य उद्योग ग्रामीण और तटीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी माना जाता है।

मत्स्योद्योग के प्रकार

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मत्स्योद्योग को मुख्यतः दो श्रेणियों में बाँटा जाता है:-

  1. समुद्री मत्स्योद्योग - इसमें समुद्र से मछलियों का पकड़ना और तटीय क्षेत्रों में उनका पालन शामिल है।
  2. अंतर्देशीय मत्स्योद्योग - इसमें नदियों, झीलों, तालाबों और कृत्रिम जलाशयों में मछली पालन और पकड़ना आता है।[2]

भारतीय संदर्भ

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भारत विश्व के प्रमुख मत्स्य उत्पादक देशों में से एक है। यहाँ "नीली क्रांति" (Blue Revolution) के अंतर्गत मत्स्य पालन को प्रोत्साहित किया गया है। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (National Fisheries Development Board) भी इस क्षेत्र में योजनाएँ और नीतियाँ लागू करता है।[3]

इन्हें भी देखें

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सन्दर्भ

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  1. Cullis-Suzuki S and Pauly D (2010) "Failing the high seas: A global evaluation of regional fisheries management organizations" Marine Policy, 34(5) pp 1036–1042.
  2. "Fisheries - Definition, History, Inland, Marine, Factors influencing, Importance - Biology Notes Online" (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). 2024-09-27. अभिगमन तिथि: 2025-08-27.
  3. "Centre highlights fisheries potential as profitable biz". The Times of India. 2025-06-13. आईएसएसएन 0971-8257. अभिगमन तिथि: 2025-08-27.