मत्ती का सुसमाचार
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| मत्ती का सुसमाचार | |
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पपाइरस 104 पर लिखित मत्ती 21:34–37 (पुनर्निर्माण; ल॰ 150 ई.) | |
| जानकारी | |
| धर्म | ईसाई धर्म |
| लेखक | मत्ती (परंपरागत) |
| भाषा | कोइने यूनानी |
| काल | गत पहली शताब्दी ई. |
| अध्याय | 28 |
| श्लोक | 1071 |
| पूर्ण पाठ | |
| अंग्रेज़ी विकिस्रोत पर | |
| [1] | |
मत्ती का सुसमाचार (प्राचीन यूनानी: Κατὰ Ματθαῖον Εὐαγγέλιον), बाइबिल के नए नियम की पहली पुस्तक है और तीन समदर्शी सुसमाचारों में से एक है। यह इसराइल के मसीहा, यीशु के जन्म से लेकर पुनरुत्थान तक उनकी सेवकाई का वर्णन करता है। मत्ती का सुसमाचार कहता है कि यीशु वह उद्धारकर्ता है जिसके आने की भविष्यद्वाणी पुराने नियम में की गई थी।
परंपरा के अनुसार, इस सुसमाचार के लेखक मत्ती हैं, पर आधुनिक विद्वानों का मानना है कि इसे गत पहली शताब्दी में किसी अनजाने यहूदी ने लिखा था।
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Jongkind, Dirk (January 13, 2015). "What is the Oldest Manuscript of the New Testament?". Evangelical Textual Criticism. May 17, 2025 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: May 17, 2025.