मणिपुर राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी

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मणिपुर राज्य एड्स नियंत्रण समिति[संपादित करें]

देश में एचआइवी संक्रमण के पहले कुछ मामलों 1986 में सूचित किये जाने के साथ ही मणिपुर राज्य सरकार भी इस समस्या को गंभीरता से लिया और महत्वपूर्ण महामारी से निपटने के उपायों की एक श्रृंखला शुरू की। 1986 में उच्च स्तरीय राष्ट्रीय एड्स समिति के गठन के साथ ही 1987 में अपनी राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम का शुभारंभ किया था, तभी तुरंत मणिपुर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य एड्स नियंत्रण समिति गठित हुई।[1]

मणिपुर राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी (एमएसीएस) का गठन[संपादित करें]

एड्स मणिपुर में एक नया और गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति के रूप में उभरा है। मणिपुर में पहली बार एचआइवी पॉजिटिव मामले फरवरी 1990 में पाय गए थे। राज्य एड्स नीति राज्य सरकार द्वारा 3 अक्टूबर 1996 को अपनायी गयी थी और यह भारत में पहली बार राज्य के एक राज्य एड्स नीति बनाई गयी थी जिसमें राज्य के नशीले पदार्थों के उपभोगताओं का विशेष रूप से उल्लेख किया गया था। मणिपुर राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी (एमएसीएस) का गठन किया गया था और मार्च 1998 में पंजीकृत किया गया था और तब से सोसाइटी राज्य में एड्स नियंत्रण कार्यक्रम को लागू कर रही है।[1]

मणिपुर राज्य में एचआइवी की स्थिति[संपादित करें]

मणिपुर गर्भवती महिलाओं के बीच एचआईवी प्रसार की दर 1.4% और इसके साथ ही भारत में छह उच्च व्याप्ति वाले राज्यों में से एक है। भारत की जनसंख्या की 0.2% आबादी के साथ मणिपुर भारत के कुल एचआइवी पॉजिटिव मामलों की लगभग 8% का योगदान दिया है। अधिक से अधिक आंतरिक और पहाड़ी क्षेत्र प्रभावित कर रहे हैं और अभी उन तक यह अभियान पहुँचना बाकी है।[1]

मणिपुर में अनाथ बच्चों की समस्या[संपादित करें]

सोसायटी फॉर एचआइवी-एड्स एंड लाइफलाइन ऑपरेशन इन मणिपुर (सालोम) नामक संगठन के निदेशक पी. वनलालमुआना ने कहा कि एड्स से अनाथ होने वाले बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, खासकर इस जिले में यह समस्या विकराल होती जा रही है। मणिपुर सरकार के वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि राज्य में एड्स से अनाथ हुए बच्चों की संख्या 1400 से 1700 हो सकती है। इनमें से कई बच्चों को अपनी मां से एड्स हुआ है। राजधानी इंफाल से 65 किलोमीटर दूर इस छोटे से शहर में हाउजल की तरह करीब 500 अनाथ बच्चे हैं। मणिपुर राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी को इस सन्दर्भ में भी कारगर कदम उठाने पड़ेंगे।[2]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "MANIPUR AIDS CONTROL SOCIETY". MANIPUR AIDS CONTROL SOCIETY. मूल से 11 मई 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 जुलाई 2012.
  2. "पूर्वोत्तर में एड्स ने अनाथ बच्चों की संख्या बढ़ाई". Nav Bharat Times. अभिगमन तिथि 15 जुलाई 2012.