भूत

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भूत का मतलब इनमें से कुछ भी हो सकता है:

  • भूतकाल जो समय बीत चुका है।


  • पंचभूत - क्षिति(पृथ्वी)-जल(द्रव)-पावक(अग्नि)- गगन(शून्य)- समीरा(वायु)। इनको भारतीय दर्शन में भूत कहते हैं जिनसे सभी जड़ (निर्जीव) पदार्थ बने हैं। शब्द भौतिक भी इसी मूल से आया है।


  • पिशाच: भूत शब्द का प्रयोग मरणोपरान्त किसी प्राणी के अस्तित्व अथवा स्मृतियों को इंगित करने के लिए भी किया जाता है। यद्यपि मरनोपरान्त प्राणी का अस्तित्व शेष रहना वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं किया जा सका है, किन्तु कुछ लोग इसमें विश्वास करते हैं।
  • आत्मा के अस्तित्व के साथ ही भूत के इस अर्थ का अस्तित्व भी जुडा है। थोड़ा गहन रूप में चिन्तन करने पर भूत को “सूक्ष्म शरीर” के समानार्थक रूप में देखा जा सकता है। “सूक्ष्म शरीर” आयुर्वेद के सिद्धान्तों के अनुसार सत्रह तत्वों से मिलकर बना होता है (पंचमहाभूतो से रहित)। इन सत्रह तत्वों में पांच ज्ञानेन्द्रियां, पांच कर्मेन्द्रियां, मन, आत्मा, बुद्धि व पंच तन्मात्राऐं शामिल हैं। पंच महाभूतों से निर्मित स्थूल शरीर से मुक्त होकर यह सूक्ष्म शरीर ही बार बार जन्मता मरता है। मरण और पुनर्जन्म के बीच के काल में यह सूक्ष्म शरीर अवयक्त रूप में रहता है। यह अव्यक्त रूप ही भूत कहा जाता है।