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भाषा विकास

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भाषा विकास (अंग्रेज़ी: Language development) वह प्रक्रिया है जो मानव जीवन में बहुत आरम्भिक अवस्था से ही शुरू हो जाती है। शिशु जन्म के समय किसी भाषा को नहीं जानते, किन्तु लगभग दस महीने की आयु तक वे बोली जाने वाली ध्वनियों और अन्य ध्वनियों के बीच अंतर करना सीख जाते हैं। इसी अवधि में वे अपनी माता की आवाज़ और भाषण-पद्धति को पहचानने लगते हैं।[1]

आमतौर पर उत्पादक भाषा (Productive language) की शुरुआत उस चरण से मानी जाती है जब शिशु इशारों और ध्वनियों के माध्यम से दूसरों को अपने इरादे बताने लगते हैं। धीरे-धीरे वे शब्दों का प्रयोग कर उन्हीं भावों को व्यक्त करने लगते हैं जिन्हें पहले वे संकेतों या ध्वनियों से व्यक्त करते थे।[2]

सैद्धांतिक ढाँचे

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भाषा अधिग्रहण

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भाषा विकास को सामान्य सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। इसमें शिशु अपने परिवेश से भाषाई इनपुट प्राप्त करते हैं और धीरे-धीरे शब्द, उनके अर्थ और वाक्य संरचना सीखते हैं।[3]

नैसर्गिकतावादी दृष्टिकोण

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नोम चॉम्स्की के अनुसार भाषा एक अद्वितीय मानवीय उपलब्धि है। उन्होंने “भाषा अधिग्रहण यंत्र” (Language Acquisition Device - LAD) का विचार प्रस्तुत किया। यह मस्तिष्क का एक काल्पनिक ढाँचा है जो सभी भाषाओं के लिए सार्वभौमिक व्याकरण नियम प्रदान करता है।[4]

अनुभववादी दृष्टिकोण

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अनुभववादी सिद्धांत के अनुसार बच्चों के लिए परिवेश से प्राप्त भाषाई इनपुट पर्याप्त होता है। इसमें माता-पिता अथवा देखभाल करने वाले शिशु से “बाल-निर्देशित भाषण” (Child-directed speech) के माध्यम से संवाद करते हैं, जिससे बच्चे भाषा के आवश्यक नियम सीखते हैं।[5]

अंतःक्रियावादी दृष्टिकोण

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इस दृष्टिकोण में भाषा को सामाजिक संवाद और सार्थक अंतःक्रिया का परिणाम माना जाता है। बच्चे परिवार और समाज के साथ संवाद करते हुए भाषा के रूपों को आत्मसात करते हैं।[6]

व्यवहारवादी दृष्टिकोण

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बी. एफ. स्किनर ने प्रस्तावित किया कि भाषा “ऑपरेटेंट कंडीशनिंग” (Operant conditioning) के माध्यम से सीखी जाती है। इसका अर्थ है कि शिशु ध्वनियों की नकल करते हैं और सही प्रतिक्रिया देने पर उन्हें प्रोत्साहन मिलता है। यद्यपि यह दृष्टिकोण व्यापक रूप से स्वीकार नहीं हुआ, परन्तु आधुनिक शोध में यह कुछ हद तक पुनः प्रासंगिक हो रहा है।[7]

अन्य सिद्धांत

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  • जीन पियाजे का संज्ञानात्मक सिद्धांत: भाषा विकास को सामान्य संज्ञानात्मक विकास की निरंतरता मानता है।[8]
  • लेव विगोत्स्की का सामाजिक सिद्धांत: भाषा विकास को सामाजिक संवाद और सहयोग का परिणाम मानता है।[9]

देखें भी

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सन्दर्भ

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  1. कुमार, अरविन्द (2010). भाषा विज्ञान का परिचय. दिल्ली: हिंदी ग्रंथ अकादमी।
  2. Hoff, Erika (2009). Language Development. Cengage Learning.
  3. Clark, Eve V. (2009). First Language Acquisition. Cambridge University Press.
  4. Chomsky, N. (1965). Aspects of the Theory of Syntax. MIT Press.
  5. Snow, C. E. (1995). "Issues in the study of input: Finetuning, universality, individual and developmental differences, and necessary causes." In P. Fletcher & B. MacWhinney (Eds.), The Handbook of Child Language. Blackwell.
  6. Vygotsky, L. S. (1978). Mind in Society: The Development of Higher Psychological Processes. Harvard University Press.
  7. Skinner, B. F. (1957). Verbal Behavior. Appleton-Century-Crofts.
  8. Piaget, J. (1970). Psychology and Epistemology. Penguin.
  9. Vygotsky, L. S. (1986). Thought and Language. MIT Press.

श्रेणियाँ

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