भारत सरकार अधिनियम 1833

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सेंट हेलेना अधिनियम या भारत सरकार अधिनियम[1][2] यूनाइटेड किंगडम की संसद द्वारा पारित एक संसदीय अधिनियम है। जिसे वर्ष 1833 में भारतीय उपमहाद्वीप में ब्रिटिश स्वामित्व क्षत्रों के प्रशासन को सुधारने हेतु बनाया गया था।

प्रावधान[संपादित करें]

जैसा कि इस अधिनियम का उद्देश्य ईस्ट इंडिया कंपनी को दिए गए शाही चार्टर के विस्तार के लिए प्रदान करना भी था, इसे 1833 का चार्टर अधिनियम भी कहा जाता है।[3] इस अधिनियम ने चार्टर को 20 वर्षों तक बढ़ा दिया। इसमें निम्नलिखित प्रावधान शामिल थे:

  • इसने भारत के गवर्नर-जनरल के रूप में बंगाल के गवर्नर-जनरल को नया स्वरूप दिया। इस प्रावधान के तहत लॉर्ड विलियम बेंटिक 1833 के आखिरी में भारत के पहले गवर्नर-जनरल बने।
  • इसने बॉम्बे और मद्रास प्रेसीडेंसी के राज्यपालों को उनकी विधायी शक्तियों से वंचित कर दिया। पहली बार गवर्नर-जनरल की सरकार को 'भारत सरकार' और उनकी परिषद को 'भारत परिषद' के रूप में जाना जाता था। गवर्नर-जनरल और उसकी कार्यकारी परिषद को पूरे ब्रिटिश भारत के लिए विशेष विधायी शक्तियाँ दी गईं।
  • इसने एक व्यावसायिक निकाय के रूप में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की गतिविधियों को समाप्त कर दिया और यह विशुद्ध रूप से प्रशासनिक निकाय बन गया। विशेष रूप से, कंपनी ने चीन और सुदूर पूर्व के अन्य हिस्सों के साथ व्यापार पर अपना एकाधिकार खो दिया।
  • इसने सिविल सेवकों के चयन के लिए खुली प्रतियोगिताओं की प्रणाली शुरू करने का प्रयास किया। हालांकि इस प्रावधान को कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स के विरोध के बाद नकार दिया गया जो कंपनी के अधिकारियों को नियुक्त करने का विशेषाधिकार रखता था।
  • सेंट हेलेना द्वीप का नियंत्रण ईस्ट इंडिया कंपनी से क्राउन में स्थानांतरित किया गया है।[4]

संशोधन[संपादित करें]

धारा 112 के अपवाद के साथ, राजशाही में संत हेलेना को छोड़कर, इस अधिनियम के सभी धाराओं को भारत सरकार अधिनियम 1915 द्वारा निरस्त कर दिया गया था।[5][6]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. The citation of this Act by this [[short title was authorised by section 5 of, and Schedule 2 to, the [[Statute Law Revision Act 1948. Due to the repeal of those provisions, it is now authorised by section 19(2) of the [[Interpretation Act 1978.
  2. The citation of this Act by this short title was authorised by section 1 of, and Schedule 1 to, the [[Short Titles Act 1896. Due to the repeal of those provisions, it is now authorised by section 19(2) of the Interpretation Act 1978.
  3. Lang, Eugen Maurice (2005) [1924]. Codification in the British Empire and America. Lawbook Exchange Ltd. पृ॰ 77, footnote 2. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 1-58477-620-X.
  4. "Saint Helena Act 1833, section 112". UK Statute Law Database]]. 26 May 2011. मूल से 4 सितंबर 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 3 August 2014.
  5. {{cite web |url=http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Will4/3-4/85/section/1111. |title=Saint Helena Act 1833, sections 1–111 |publisher=[[UK Statute Law Database |date=26 May 2011 |accessdate=3 August 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140915110632/http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Will4/3-4/85/section/1111. |archive-date=15 सितंबर 2014 |url-status=live }}
  6. "Saint Helena Act 1833, sections 113–117". UK Statute Law Database]]. 26 May 2011. मूल से 3 सितंबर 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 3 August 2014.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]