भार

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भौतिकी में किसी वस्तु पर पृथ्वी द्वारा लगाऐ गऐ गुरूत्वाकर्षण बल के मान को ही भार कहते हैं, पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण लगभग समान होता है, इसलिए किसी वस्तु का भार उसके द्रव्यमान के अनुपाती होता है किसी लिफ्ट में बैठे हुए व्‍यक्ति को अपना भार कब अधिक मालूम पड़ता है – जब लिफ्ट त्‍वरित गति से ऊपर जा रही हो एक व्‍यक्ति पूर्णत: चि‍कने बर्फ के क्षैतिज समतल के मध्‍य में विराम स्थिति में है। न्‍यूटन के किस/किन नियम/नियमों का उपयोग करके वह अपने आपको तट तक ला सकता है – तीसरा गति नियम 20 किलोग्राम के वजन को जमीन के ऊपर 1 मीटर की ऊँचाई पर पकड़े रखने के लिए किया गया कार्य है – शून्‍य जूल एक व्‍यक्ति एक दीवार को धक्‍का देता है, पर उसे विस्‍थापित करने में असफल रहता है, तो वह करता है – कोई भी कार्य नहीं पहाड़ी पर चढ़ता एक व्‍यक्ति आगे की ओर झुक जाता है, क्‍योंकि – शक्ति संरक्षण हेतु पीसा की ऐतिहासिक मीनार तिरछी होते हुए भी नहीं गिर‍ती है, क्‍योंकि – इसके गुरूत्‍वकेन्‍द्र से जाने वाली ऊर्ध्‍वाधर रेखा आधार से होकर जाती है एक ऊँची इमारत से एक गेंद 9.8 मी/सेकण्‍ड2 के एकसमान त्‍वरण के साथ गिरायी जाती है। 3 सेकण्‍ड के बाद उसका वेग क्‍या होगा – 29.4 मी/से एक वस्‍तु का द्रव्‍यमान 100 किग्रा है (गुरूत्‍वजनित ge = 10ms-1) अगर चन्‍द्रमा पर गुरूत्‍वजनित त्‍वरण ge/6 है तो चन्‍द्रमा में वस्‍तु का द्रव्‍यमान होगा – 100 किग्रा पावर (शक्ति) का SI मात्रक ‘वाट’ (watt) किसके समतुल्‍य है – किग्रा मी -2 से -3 भारहीनता की अवस्‍था में एक मोमबत्‍ती की ज्‍वाला का आकार – वही रहेगा एक केशनली में जल की अपेक्षा एक तरल अधिक ऊँचाई तक चढ़ता है, इसका कारण है – तरल का पृष्‍ठ तनाव जल की अपेक्षा अधिक है गुरूत्‍वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम का प्रतिपादन किसने किया – न्‍यूटन ऊर्जा संरक्षण का आशय है कि – ऊर्जा का न तो सृजन हो सकता है और न ही विनाश