ब्रांड

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सन् १८८६ का एक अमेरिकी विज्ञापन जिसमें एक साइकल के "कोलम्बिया" नामक ब्रांड का प्रचार करा गया था

ब्रांड एक एसे नाम, डिज़ाईन अथवा किसी एसे विशेष लक्षण को कहा जाता है जो कि किसी एक विक्रेता के उत्पाद को दूसरे से अलग करता हो। ब्रांड का प्रयोग व्यापार, विपणन व प्रचार में किया जाता है।[1] किसी उत्पादन या सेवा का ब्रांड चुनते हुए विक्रेता या निर्माता उसे ग्राहकों के लिए आकर्षक बनाने का प्रयास करता है, इसलिए कम्पनियाँ अपना ब्रांड चुनने के लिए अक्सर बहुत पैसा ख़र्च करती हैं और कई सम्भावनाएँ परखने के बाद एक को चुनती हैं।[2] समय के साथ-साथ ग्राहक कुछ ब्रांडों को भरोसेमन्द समझना शुरु कर देते हैं और इस से ब्रांड का अपना मूल्य बन जाता है। यानि यदि एक ही वस्तु पर कोई जाना-माना और पसंदीदा ब्रांड लगाया जाए तो उसकी बिक्री में स्वयं ही बहुत बढ़ौतरी हो जाती है। कुछ नुमाया ब्रांडों का मूल्य समय-समय पर आंका जा सकता है, मसलन भारत के प्रसिद्ध टाटा ब्रांड का मूल्य सन् २०१५ में १५ अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया था।[3]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. अमेरिकन मार्केटिंग एसोसिएशन Dictionary. Retrieved 2011-06-29. The Marketing Accountability Standards Board (MASB) endorses this definition as part of its ongoing Common Language in Marketing Project.
  2. Bhimrao M. Ghodeswar (2008-02-29). "Building brand identity in competitive markets: a conceptual model". Journal of Product & Brand Management. 17 (1): 4–12. आइ॰एस॰एस॰एन॰ 1061-0421. डीओआइ:10.1108/10610420810856468.
  3. "At $15 billion, Tata remains India’s most valuable brand," P.R. Sanjai, 31 July 2015, Live Mint Newspaper