बोलना

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
एम आर आई में मुँह द्वारा बोलने की क्रिया की जाँच

बोलना (speech) वाक-शक्ति द्वारा ध्वनियों को जोड़कर बने एक विस्तृत शब्दकोश के शब्दों का प्रयोग कर के करी गई संचार की क्रिया को कहते हैं। आमतौर पर प्रभावशाली संचार के लिये बोलने में कम-से-कम १,००० शब्दों का प्रयोग देखा गया है। हर शब्द को स्वर और व्यंजन वर्णों का स्वानिक मिश्रण कर के बनाया जाता है। इन शब्दकोशों और उनमें से शब्द चुनकर वाक्यों में संगठित करने वाले वाक्यविन्यास में कई विविधताएँ हो सकती हैं जिस कारणवश विश्व में हज़ारों मानवीय भाषाएँ देखी जाती हैं। अधिकतर मानव दो या उस से अधिक भाषाओं में संचार करने में सक्षम होते हैं, यानि बहुभाषी (पॉलिग्लाट, polyglot) होते हैं। वही वाक-शक्तियाँ जो मानवों को बोलने की योग्यता देती हैं, गाने में भी प्रयोग होती हैं। बहरे लोगों में हाथ व अंगुलियों द्वारा बनाई आकृतियों से भी पूरे रूप से संचार होता है।[1]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Tucker, G. Richard (1999). "A Global Perspective on Bilingualism and Bilingual Education.". Carnegie Mellon University. http://www.cal.org/resources/digest/digest_pdfs/9904-tucker-globalBE.pdf. अभिगमन तिथि: 23 April 2012.  (Archive)