बबूल

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आकास्या नीलोतीका
Acacia nilotica, Wonderboom Natuurreservaat.jpg
वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत: पादप
संघ: माग्नोल्योफ़्इउता
वर्ग: माग्नोल्योप्सीदा
गण: फ़ाबालेस्
कुल: फ़ाबासेऐ
उपकुल: मीमोसोईदेऐ
ट्राइब: आकाक्येऐ
प्रजाति: आकास्या
जाति: आ. नीलोतीका
द्विपद नाम
आकास्या नीलोतीका
(L.) विल्ड. एक्स डेलिले
बबूल का प्राप्ति क्षेत्र
बबूल का प्राप्ति क्षेत्र
पर्याय
  • Acacia arabica (Lam.) Willd.
  • Acacia scorpioides W.Wight
  • Mimosa arabica Lam.
  • Mimosa nilotica L.
  • Mimosa scorpioides L.[1]

बबूल या कीकर (वानस्पतिक नाम : आकास्या नीलोतिका) अकैसिया प्रजाति का एक वृक्ष है। यह अफ्रीका महाद्वीप एवं भारतीय उपमहाद्वीप का मूल वृक्ष है।

उत्तरी भारत में बबूल की हरी पतली टहनियां दातून के काम आती हैं। बबूल की दातुन दांतों को स्वच्छ और स्वस्थ रखती है। बबूल की लकड़ी का कोयला भी अच्छा होता है। हमारे यहां दो तरह के बबूल अधिकतर पाए और उगाये जाते हैं। एक देशी बबूल जो देर से होता है और दूसरा मासकीट नामक बबूल. बबूल लगा कर पानी के कटाव को रोका जा सकता है। जब रेगिस्तान अच्छी भूमि की ओर फैलने लगता है, तब बबूल के जगंल लगा कर रेगिस्तान के इस आक्रमण को रोका जा सकता है। इस प्रकार पर्यावरण को सुधारने में बबूल का अच्छा खासा उपयोग हो सकता है।[2] बबूल की लकड़ी बहुत मजबूत होती है। उसमें घुन नहीं लगता. वह खेती के औजार बनाने के काम आती है।[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. ILDIS LegumeWeb
  2. रिसोर्स सेंटर फॉर इंडियन लैंग्वेज सॉल्यूशंस पर
  3. बबूल के प्रयोग

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]