बकासुर

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बकासुर एक दानव जो की महाभारत युद्ध का एक चरित्र था। बकासुर दैत्य का वध पांडू पुत्र भीम ने किया था।

महापुरूष का कहना है कि एकचक्रनगरी के शहर में एक छोटा सा गांव, उत्तर प्रदेश के जिले प्रतापगढ़ शहर के दक्षिण में स्थित द्वैतवन में रहता था वर्तमान में चक्रनगरी को चकवड़ के नाम से जाना जाता है। बकासुर मुख्यतः तीन स्थान में रहता था जो द्वैतवन के अंतर्गत आता था। पहला चक्रनगरी, दूसरा बकागढ़, बकासुर इस क्षेत्र में रहता था इस लिए इस स्थान का नाम बकागढ़ पड़ा था किन्तु वर्तमान में यह स्थान बकाजलालपुर के नाम से जाना जाता है जो की इलाहाबाद जिले के अंतर्गत आता है। तीसरा और अंतिम स्थान जंहा राक्षस बकासुर रहता था वह था डीहनगर, जिला प्रतापगढ़ के दक्षिण और इलाहाबाद जिला ले उत्तर में बकुलाही नदी के तट पर बसा है। इस स्थान को वर्तमान में ऊचडीह धाम के नाम से जाना जाता है। लोकमान्यता है कि इसी जगह राक्षस बकासुर का वध भीम ने अज्ञातवास के दौरान किया था।

बकासुर का वध[संपादित करें]

जब महाभारत काल मे पांडव पुत्र भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव तथा उनकी माता अज्ञातवास मे थे, तब भीम और उनके भाई भटकते भटक्ते एक गाव मे पहुंच गये, जहा बकासुर नामके एक विशालकाय राक्षस का आतंक था. वह राक्षस उस गाव के नग्रिको को त्रस्त करता था. उनाको काहाता था की हर गाव वालेमेसे कोई ना कोई उसके लिये भोजन लेकर आयेगा . नहीतो वो गाव मे आकार लोगोको उठाकर खा लेगा. तो लोगोने बकासुर के आतंक से बचने हेतू उस को भोजन पहुचना प्रारंभ किया. हर रोज कोई ना कोई गावं वला बकासुर को उसकी गुफा मे भोजन ले जाता था. भोजन भी इतना होता था जितना तींसो उसासे भी ज्यादा लोग खा साके. भीम तथा उनके भाई भी उसी गाव मे राहणे पाहूचचुके थे. भीम को जब बाकासुर के आतंक के बारे मे पता चला उँको उसेका सामना करणे की और बाकसुर के आतंक से गाववालो को मु करणे की इच्छा हुई. जब पांडव पुत्र भीम की बरी आई; बकसुर के पास उस्को भोजन पागुचाने की तो ओ चलपडे बक आसुर की गुफा की और जो जंगल मे स्तीत थी.

जब भीम बकासुर के सामने पाहूचगये तो बकासुर ने उन्से काहा तो तुम लेकरं आये हो भोजन मेरे लिये. भीम जी ने कहा मे भोजन नाही लेकरं आया हू. मे तुम्हरे आतंक से गावं वलो को आस पास के गाववालो को, तुमहारे आतंकसे मुक्त करणे आया हु. उन्मे उद्ध हुवा और महाबली भिमजी ने बकासुर का वध कर दिया.