फ्लोएम

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⭐️'फ्लोएम(पोषवाह) [Phloem G.K. Phlois=Inner bark]-

पौधों में पाया जाने वाला एक जटिल स्थायी ऊतक(complex permanent tissue) [ पोधों में जटिल ऊतक कोशिकाओं का वह समूह होता है,जिनमें एक से अधिक प्रकार की कोशिकाऐं पायी जाती है,परन्तु क्रियात्मक रूप से वे एकसमान होती है ।] 

( The group of cells which are structurally different but similar in their function is called complex permanent tissue)|

पोधों में दो प्रकार के जटिल स्थायी ऊतक पाये जाते हैं-


1.जाइलम अथवा दारू(Xylem)|


⭐️2.फ्लोएम अथवा पोषवाह(Phloem)|


⭐️इस लेख में फ्लोएम अथवा पोषवाह ( PHLOEM) का वर्णण किया हैं-

⭐️फ्लोएम संवहन ऊतक है,इसे बास्ट(bast) भी कहा जाता है| फ्लोएम एक जटिल स्थाई ऊतक है। यह संवहन वंडल के अन्दर पाया जाता हैं| इसका मुख्य कार्य पत्तियों ध्दारा बनाये गये कार्बनिक भोज्य पदार्थ का संवहन पोधों के अन्य भाग तक करना हैं|

⭐️ उत्पति के आधार पर फ्लोएम प्राथमिक या ध्दितीयक (Primary and Secondary Phloem) प्रकार का होता हैं|

⭐️प्राथमिक फ्लोएम की उत्पति प्राक् विभज्योतक (Promeristem) से तथा ⭐️ध्दितीयक फ्लोएम की उत्पत्ति संवहन एधा (Vascular Cambium) से होती हैं|


⭐️फ्लोएम का निर्माण निम्नलिखित चार प्रकार की कोशिकाओं से हुआ है-
1. चालनी नलिका (Seive tubes)
2. सह कोशिकाएँ (Companion cells)
3. फ्लोएम मृदूतक (Phloem parenchyma)
4. फ्लोएम तन्तु अथवा बास्ट रेशे (Bast fibres) |

⭐️⭐️⭐️फ्लोएम अथवा पोषवाह के विभिन्न घटकों में केवल फ्लोएम तन्तु अथवा बास्ट रेशे (Bast fibres) ही मृत होते हैं| शेष सभी घटक जीवित होते हैं|⭐️⭐️⭐️



⭐️विस्तृत विवरण निम्न प्रकार है.-

⭐️1.चालनी नलिका ( SEIVE TUBES ) - ये लम्बी,पतली एवं नलिकाकार कोशिकाएँ हैं,जो एक-दूसरे के ऊपर लम्बवत रूप से लगी होती हैं| इनकी भित्तियाँ पतली होती हैं, जो सेल्यूलोज की बनी होती हैं| कोशिकाओं की अनुप्रस्थ भित्ति पर अनेक छिद्र (PORES) पाये जाते हैं| इनकी उपस्थिति के फलस्वरूप ही इन्हें चालनी नलिका (SEIVE TUBES) कहा जाता है| दो समीपस्थ चालनी नलिकाओं के चालनी पट्ट (SIEVE PLATE ) के बीच कोशिकारसीय तन्तु (CYTOPLASMIC STRANDS ) पाये जाते हैं| इनके ध्दारा दो चालनी नलिकाएँ आपस में जुड़ी होती हैं| जब एक चालनी कोशिका में एक ही चालनी पट्ट (SIEVE PLATE ) पाया जाता है,तो इसे सरल चालनी पट्ट ( SIMPLE SIEVE PLATE ) कहते हैं| दूसरी ओर यदि एक चालनी कोशिका अथवा नलिका पर एक से अधिक चालनी पट्ट पाये जाते हैं,तो ये संयुक्त चालनी पट्ट ( COMPOUND SIEVE PLATE ) कहलाते हैं| कभी-कभी चालनी पट्ट, चालनी नलिकाओं के पार्श्र्व भित्ति पर पाये जाते हैं| इन्हें पाश्यर्वीय अथवा लम्बवत् चालनी पट्ट ( LATERAL OR LONGITUDINAL ) कहा जाता है| उदाहरण :- फर्न आदि| शरद ऋतु में चालनी पट्ट कैलोस ( CALLOSE ) नामक कार्बोहाइड़ेट ध्दारा ढँक दिये जाते हैँ,इन्हें कैलस (CALLUS) कहा जाता है| बसन्त ऋतु में पुन: ये कैलस खुल जाते हैं| प्रौढ़ चालनी नलिका में केन्द्रक नहीं पाया जाता| फिर भी ये जीवित होती हैं| इनका जैविक कार्य इनसे सटे सखि कोशिकाओं के केन्द्रक की सहायता से संपन्न होता है|



⭐️2.सह अथवा सखि कोशिकाएँ ( COMPANION CELLS ) - ये जीवित एवं लम्बी कोशिकाएँ हैं जो चालनी नलिका (SEIVE TUBES) के बाजू में पायी जाती हैं| प्राय: एक नलिका के बगल में एक सह कोशिका पायी जाती है| ये चालनी नलिका (SEIVE TUBES ) के जैविक गतिविधियों पर नियंत्रण रखती हैं| सह कोशिकाओं (COMPANION CELLS ) की उपस्थिति पुष्पीय पौधों (FLOWERING PLANTS ) की विशेषता है| पौधों के अन्य समूह में ये नहीं पायी जाती है सह कोशिका ( COMPANION CELLS ) तथा चालनी नलिका (SEIVE TUBES ) दोनों की उत्पत्ति एक ही कोशिका से होती है|



⭐️3. फ्लोएम पैरेनकाइमा ( PHLOEM PARENCHYMA ) - ये जीवित कोशिकाएँ हैं, जो सामान्य मृदूतक कोशिकाओं के समान होती हैं| ये एकबीजपत्री ( MONOCOT ) पौधों में नहीं पाये जाते| ये जल तथा भोज्य पदार्थ के संग्रहण का कार्य करती हैं, परन्तु आवश्यकता होने पर चालनी नाल से भोज्य पदार्थ का स्थानान्तरण मज्जा किरणों (MEDULLARY RAYS ) की कोशिकाओं तक करती हैं|




⭐️4. फ्लोएम तन्तु अथवा बास्ट रेशे ( PHLOEM AND BAST FIBRES ) - फ्लोएम से संबध्द स्केलेरेनकाइमेटस रेशे ( SCLERENCHYMATOUS FIBRES ) को फ्लोएम रेशे कहते हैं| ये प्राथमिक तथा ध्दितीयक दोनों फ्लोएम में पाये जाते हैं| ये पौधों को यांत्रिक सहारा प्रदान करते हैं| सन,जूट,पटवा आदि में पाये जाने वाले रेशे(तन्तु) फ्लोएम रेशे ही होते हैं|




⭐️⭐️जाइलम के समान फ्लोएम भी प्राक्पोषवाह (Protophloem) तथा अनुपोषवाह (Metaphloem) में विभेदित होते हैं| प्राक्पोषवाह (PROTOPHLOEM) की चालनी नलिकाएँ (SEIVE TUBES) छोटी तथा संकीर्ण (Narrower) होती हैं| इनके साथ सह (सखि)कोशिकाएँ नहीं पायी जाती| अनुपोषवाह (METAPHLOEM) लम्बी तथा अधिक चौड़ाई वाले होते हैं| बाद के विकास की अवस्था में अनुपोषवाह की वृध्दि रूक जाती है|




By:- Dr. AYUSH PARIHAR

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