फ़रवहर

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फ़रवहर का चिह्न
असीरियाई देवता अशूर, जिस से फ़रवहर का चिह्न विकसित हुआ

फ़रवहर, जिसे प्राचीन फ़ारसी में प्रवहर लिखते थे,[1] पारसी धर्म का सब से अधिक पहचाने जाने वाला चिह्न है। बीसवीं सदी में ईरान पर राज करने वाले पहलवी राजवंश ने इसे अपने साम्राज्य का और ईरानी राष्ट्र का चिह्न भी चुना था। इसमें एक परों वाले चक्र के बीच एक राजसी आकृति का दाढ़ी वाला व्यक्ति दर्शाया जाता है।

फ़्रवशी से सम्बन्ध[संपादित करें]

अवस्ता (पारसी धर्म-ग्रन्थ) में 'फ़्रवशी' दिव्य रक्षक-आत्मा को कहते हैं। इसके विपरीत 'उर्वन' वह आत्मा होती है जो संसार में अच्छे-बुरे की अनंत लड़ाई में अच्छाई के लिए लड़ने भेजी जाती है। यह मान्यता है कि शारीरिक मृत्यु के चार दिन बाद उर्वन फ़्रवशी को लौट जाती है और संसार में हुए अपने अनुभवों को फ़्रवशी को दे देती है। 'फ़रवहर' शब्द इसी 'फ़्रवशी' शब्द से उत्पन्न हुआ है और आधुनिक सोच है कि यह चिह्न उसी रक्षक आत्मा को दर्शाती है।[2] ध्यान दें कि 'फ़्रवशी' शब्द 'फ़्रवर्ती' का एक रूप है, क्योंकि 'र्त' अवस्ताई भाषा में अक्सर 'श' बन जाता था। क्योंकि संस्कृत और अवस्ताई दोनों हिन्द-ईरानी भाषा परिवार की बहनें हैं, इसलिए संस्कृत में इसका सजातीय शब्द 'प्रवर्तिन' होता, जिसका अर्थ है 'वह जो आगे ले जाए'। लेकिन यह शब्द संस्कृत में इस रूप में नहीं मिलता और इसकी बजाए संस्कृत का सही शब्द 'प्रवर्तक' है, जिसका अर्थ है 'वह जो आगे बढ़ाए'।[3]

चिह्न की उत्पत्ति[संपादित करें]

पर-युक्त चक्र या पर-युक्त सूर्य का चिह्न मध्य पूर्व के क्षेत्र में प्राचीनकाल से प्रयोग होता आया है। यह कांस्य युग की मोहरों में भी देखा जा सकता है। कुछ समय बाद इस चक्र के अन्दर एक मनुष्य की आकृति भी डाली जाने लगी थी। असीरियाई लोगों के लिए यह उनके अशूर (ܐܫܘܪ, Ashur) नामक देवता का रूपांकन था। यह फ़रवहर के चिह्न का स्रोत होने के बावजूद यह ज्ञात नहीं है कि जिन ईरानी विद्वानों ने इस चिह्न का प्रयोग पारसी धर्म में आरम्भ किया। वे इस चिह्न के साथ क्या मतलब जोड़ते थे। इतना ज़रूर है कि ईरान में इसे सबसे पहले शाही शिलालेखों में देखा गया इसलिए शायद यह 'ख़्वारनाह​' का प्रतीक रहा हो। 'ख़्वारनाह​' (khvarenah) शब्द का मतलब पारसी धर्म-ग्रंथों में 'सम्राट की दिव्य महानता' निकलता है, यानि वह दिव्य महानता जो किसी शासक या सम्राट के साथ जुड़कर उसकी सहायता करे। संभव है कि फ़रवहर इन शिलालेखों में सम्राट की फ़्रवशी दर्शा रहा हो।[4]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. The Encyclopedia Iranica gives several Middle Iranian renderings: fraward, frawahr, frōhar, frawaš, frawaxš. The form frawahr reflects the Pazend dibacheh form, corresponding to Book Pahlavi prʾwhr).
  2. Angels: A Very Short Introduction, David Albert Jones, pp. 11, Oxford University Press, 2011, ISBN 978-0-19-954730-2, ... For example, the most common modern symbol for Zoroastrianism, a winged human figure (termed a faravahar because it is supposed to represent a fravashi), is in some ways a modern invention. Though the symbol is ancient, the name is modern ...
  3. Theosophy, or, Psychological religion: the Gifford lectures delivered before the University of Glasgow in 1892, The eschatology of the Avesta, Friedrich Max Müller, pp. 205, Longmans, Green, and Co., 1899, ... we find in the Avesta the Fravashis, or in an earlier form the Fravardin. This would correspond to a Sanskrit word pravartin, which, however, does not occur in Sanskrit. Pravartin might mean what moves forward or sets in motion, like pravartaka, a promoter, but it is explained in Zend as meaning protector ...
  4. Omnibus IV: The Ancient World, Veith, Wilson, Fischer, Veritas Press, 2009, ISBN 978-1-932168-86-0, ... In a Persian version of the emperor cult, the faravahar symbolized the winged sun in Zoroastrianism and also the divine authority of the king ...