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प्राकृतिक दर्शनशास्त्र

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डच मानचित्रकार फ्रेडरिक डी विट द्वारा निर्मित 17वीं शताब्दी का एक खगोलीय मानचित्र

प्राकृतिक दर्शन (अंग्रेज़ी: Natural philosophy) प्रकृति तथा भौतिक ब्रह्मांड के दार्शनिक अध्ययन को कहा जाता है। आधुनिक विज्ञान के विकास से पहले प्राकृतिक जगत से संबंधित ज्ञान और उसके सिद्धांतों का अध्ययन इसी के अंतर्गत किया जाता था। इसे प्राकृतिक विज्ञान का प्रारम्भिक रूप तथा आधुनिक विज्ञान का अग्रदूत माना जाता है।[1]

प्राकृतिक दर्शन में खगोलशास्त्र, भौतिकी, जीवविज्ञान, रसायन विज्ञान तथा प्रकृति से संबंधित अन्य विषयों का अध्ययन सम्मिलित था। प्राचीन यूनान के दार्शनिक अरस्तू को प्राकृतिक दर्शन की परंपरा के प्रमुख विचारकों में गिना जाता है।[2]

17वीं और 18वीं शताब्दी में वैज्ञानिक पद्धति के विकास के साथ प्राकृतिक दर्शन धीरे-धीरे आधुनिक विज्ञान में परिवर्तित हो गया। आज भी कुछ विश्वविद्यालयों में विज्ञान के कुछ पारंपरिक पाठ्यक्रमों के लिए Natural Philosophy शब्द का उपयोग किया जाता है।[3]

इन्हें भी देखें

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सन्दर्भ

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  1. Lindberg, David C. (2007). The Beginnings of Western Science. University of Chicago Press. ISBN 9780226482057.
  2. Grant, Edward (2007). A History of Natural Philosophy. Cambridge University Press. ISBN 9780521869317.
  3. "Natural philosophy". Encyclopaedia Britannica. अभिगमन तिथि: 13 मई 2026.