पोलियो वाइरस

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पोलियो वाइरस एक विषाणु है। यह मानव में पोलियो रोग का कारण है। यह एक आर एन ए (RNA) वायरस है और पिकोर्नविरिडी परिवार में एंटरोवायरस सी प्रजाति का एक सीरोटाइप है। पोलियोवायरस के तीन सीरोटाइप होते हैं: सीरोटाइप 1, सीरोटाइप 2, और सीरोटाइप 3--पोलियो रोग को रोकने के लिए तीनो सीरोटाइप से बचाव आवश्यक है। टाइप 2 वाइल्ड पोलियोवायरस भारत में आखिरी बार 1999 में पाया गया, इस स्ट्रेन को सितंबर 2015 में समाप्त घोषित किया गया। टाइप 3 वाइल्ड पोलियोवायरस को आखिरी बार नवंबर 2012 में पाया गया इसे अक्टूबर 2019 में उन्मुलित घोषित किया गया। आजकल केवल टाइप 1 वाइल्ड पोलियोवायरस समाज में पोलियो फैला रहा है।[1] 2022 मे अमरीका लंदन और जेरूसलेम में पाए गए टाइप 2 पोलियो वायरस के मरीज का संबंध वैक्सीन द्वारा संक्रमित पोलियो वायरस से होने के संकेत मिले है।[2][3]

टीका-व्युत्पन्न पोलियोवायरस (वीडीपीवी VDPV) मुँह के द्वारा दी जाने वाली पोलियो वैक्सीन (ओपीवी,OPV) में निहित जीवित परन्तु जीर्ण पोलियोवायरस से संबंधित वायरस है। जो साधारणतया हानि रहित होता है । पर जब यह वायरस अप्रतिरक्षित या आंशिक रूप से प्रतिरक्षित आबादी में लंबे समय तक प्रसारित रहता है, और जब किसी कमजोर प्रतिरक्षा विहीन व्यक्ति में प्रजनन करता है, तो यह जीर्ण कमजोर वायरस भी एक ऐसे रूप में परिवर्तित हो सकता है जो पोलियो की बीमारी और पक्षाघात (paralysis) का कारण बन जाता है।[4][5] अतः समाज में 5 साल तक के बच्चो सम्पूर्ण टीका करण आवश्यक है।[6]

सन्दर्भ[संपादित करें]