पूर्वाग्रह

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पूर्वाग्रह (prejudice) का अर्थ 'पूर्व-निर्णय' है, अर्थात् किसी मामले के तथ्यों की जाँच किये बिना ही राय बना लेना या मन में निर्णय ले लेना। इस शब्द का उस स्थिति में प्रयोग किया जाता है जब किसी व्यक्ति या लोगों के किसी समूह के विरुद्ध निर्णय दिया गया हो और वह व्यक्ति या लोग किसी विशेष लिंग, राजनैतिक विचार, वर्ग, उम्र, धर्म, जाति, भाषा, राष्ट्रीयता के हों।

पूर्वाग्रह के प्रकार[संपादित करें]

पूर्वाग्रह के प्रकार अनेक आधारों पर बताये गये है यहाँ पूर्वाग्रह के कुछ प्रमुख प्रकारों का वर्णन निम्न प्रकार से हैं

(1 ) जाति पूर्वाग्रह ( caste Prejudice ) - भारतवर्षों में अनेक जातियों के लोग रहते हैं । भिन्न - भिन्न जाति के लोग एक - दूसरे को समान दृष्टि से नहीं देखते हैं । उच्च जाति में निम्न जाति के प्रति अनेक पूर्वाग्रह प्रचलित हैं । उदाहरण के लिए जब वैश्य आति के व्यक्ति को कोई लाला कहता है तब कहने वाले मस्तिष्क में लाला की प्रतिमा बनती हैं । उच्च जाति के लोग निम्न आति के लोगों को सेवक या नौकर की दृष्टि से देखते हैं ।

(2). यौन पूर्वाग्रह ( sex Prejudice ) - लिंग या सेक्स के आधार पर जो पूर्वाग्रह विकसित होते हैं उन्हें यौन पूर्वाग्रह कहते हैं । समाज मनोवैज्ञानिक ने यौन पूर्वानों का अध्ययन कर देखा कि यौन पूर्वाग्रह के कारण ही स्त्रियों को कमजोर , मुलायम हदय वालीख सहानुभूति वाली , दूसरे पर निर्भर रहने वाली और नेतृत्व गुणों से रहित समझा जाता हैं । इसी प्रकार के पूर्वाग्रहों के कारण ही पुरुषों को प्रभुत्वशाली , स्वतन्त्र और मेहनती समझा जाता है । इस प्रकार के परिणाम अनेक अध्ययनों से प्राप्त हुए हैं । ( Goklberg , 1968 ; Broverman , 1970 ) । परन्तु इस प्रकार के पूर्वाग्रमो का अमेरिका में जो अध्ययन हुआ है उनसे यह सिद्ध हुमा है कि पुरुषों और महिलाओं के पूर्वाग्रह अब काफी बदल चुके हैं । ( Merg , 1987 ) ने अपने अध्ययनों आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि अमेरिका में अब महिलाओं और पुरुषों को समान या समान गुणों वाला समझा जाने लगा है । स्त्री पुरूषों के पूर्वाग्रह में जो परिवर्तन हुए है यह केवल विकसित देशों में हुए हैं । दूसरी ओर भारत जैसे विकासशील देशों में कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है । भारत में आज भी स्त्री को अबला , विनय और घर में रहने वाली कठपुतली आदि समझा जाता हैं ।

(3) . भाषा पूर्वाग्रह ( Language Prejudice ) - भारतवर्ष में अनेक प्रकार की भाषा बोलने वाले लोग रहते हैं । एक भाषा बोलने वाले लोग अपने को एक समूह का सदस्य समझते है जबकि दूसरी भाषा बोलने वाले लोग अपने को दूसरे समूह का सदस्य समझते हैं । एक प्रकार की भाषा बोलने वाले लोग दूसरी प्रकार की भाषा बोलने वाले लोगों को अपना नहीं समझते हैं । उन्हें अपरिचित समझा जाता हैं , उनकी भाषा को अप्रिय और असंगत समझा जाता है । इस प्रकार की विचार धारा अलग - अलग भाषा बोलने वाले लोगों में पायी जाती हैं । समान भाषा बोलने वाले लोगों से मित्रवत् व्यवहार किया जाता हैं । उ . प्र . में अवधी भाषा बोलने वाले लोग जब ब्रज क्षेत्र में जाते है तब उन्हें ब्रज क्षेत्र के लोग पिछड़ा ( Backward ) और देहाती समझते हैं । भाषा को लेकर भी मनमुटाव और तनाव उत्पन्न होता है ।

(4)धर्म पूर्वाग्रह ( Religion Prejudice ) - अपने देश में भिन्न - भिन्न धर्मों के लोग रहते हैं । प्रत्येक धर्म के लोग अपने धर्म को श्रेष्ठ और दूसरे धर्म के लोगों को कुछ हीन दृष्टि से देखते हैं । उदारहण के लिए मुस्लिम धर्म के लोग अपने धर्म के लोगों को खुदा की औलाद बताते हैं । जबकि भिन्न धर्म वाले लोगों को काफिर कहते हैं । हिन्दु लोग मुस्लिम लोगों को गन्दा समझते हैं । सिक्ख धर्म के लोगों को बहुत धूर्त और चालाक समझा जाता है । अपने समाज के लोगों में खत्री लोगों में कहावत है खत्री पुत्रम् कभी न मित्रम् , जब मित्रम् तब दगी - दगा । इस दिशा में हुए अध्ययनों में यह देखा गया है कि जो लोग धर्म में विश्वास नहीं करते है उन लोगों में भी धर्म सम्बन्धि त पूर्वाग्रह पाये जाते हैं ।

(5) क्षेत्रीय पूर्वाग्रह ( Regional Prejudice ) - अपने देश में भिन्न - भिन्न प्रदेश वाले दूसरे लोग दूसरे प्रदेश में रहने वाले लोगों से पूर्वाग्रह पूर्ण व्यवहार करते हैं । उदाहरण के लिए गाँव और देहात में रहने वाले लोग नासमझ और बेवकूफ समझते हैं । इसी प्रकार से बड़े महानगरों में रहने वाले लोग जैसे दिल्ली और मुम्बई में रहने वाले लोगों को दूसरे लोग अधिक चालाक , अधिक धूतं और अधिक खुदगर्ग ( Selfish ) समझते हैं । इसी प्रकार से बिहार में रहने वाले लोगों को बुधू और झगड़ालू समझा जाता बंगालियों को डरपोक और कमजोर समझा जाता हैं इत्यादि

(6)आयु पूर्वाग्रह ( Age Prejudice ) - आयु के आधार पर भी पूर्वाग्रह होते हैं । अधिक आयु के लोग कम आयु के लोगों को अपरिपक्व , कम अनुभवी और जोशिला समझते हैं वहीं अधिक आयु के लोगों को दूसरी आयु के लोगों द्वारा निश्क्रिय , असमाजिक और जराजीणं ( Senile ) समझा जाता है और ऐसा समझकर वयोवृद्ध लोगों के साथ व्यवहार किया जाता है । बटलर ( 1980 ) के अनुसार , आयुवाद ( Ageism ) के ही कारण दूसरे आयु के लोग वयोवृद्ध लोगों के प्रति ऋणात्मक अभिवृति ( Negative attitude ) का प्रदर्शन करते हैं ।

पूर्वाग्रह की विशेषताएँ

( 1 ) पूर्वाग्रह सीखें हुए होते हैं ( prejudices are learned ) - समाज मनोवैज्ञानिक ने पूर्वाग्रह का वर्णन सीखे हुए व्यवहार के रूप में किया जाता हैं । पूर्वाग्रहों का विकास क्रमशः होता है . यह जन्म के समय विद्यमान नहीं होते हैं । पूर्वाग्रहों का विकास बालकों में तीसरे चौथे वर्ष ही आरम्भ जाता है । एक बालक में यहीं पूर्वाग्रह निर्मित या विकसित होते है जो पूर्वाग्रह उसके परिवारीजनों या निकट सम्बन्धि में पाये जाते हैं । गुडमैन ( 1952 ) ने अपने अध्ययनों के आधार पर बताया कि बालक में शिक्षा और अनुभव के आधार पर दूसरी जाति के लोगों और दूसरे राष्ट्र के प्रति मित्रता या त्रुता को भावनाएं विकसित होती हैं । पूर्वाग्रह को अर्जित प्रक्रिया के रूप में सभी मनोवैज्ञानिक स्वीकार करते हैं और यह मानते है कि बालक जैसे - जैसे दूसरे आति समूह प्रजाति के सम्पर्क में आता है उस बालक में पूर्वाग्रह उसके अर्जित अनुभवों के पर निर्मित और विकसित होते हैं ।

( 2 ) पूर्वाग्रह अतार्किक होते हैं ( Prejudices are Irrational ) - पूर्वाग्रह तथ्यों पर आधारित नहीं होते है अथवा इस प्रकार भी कह सकते है कि पूर्वाग्रह तर्क पर आधारित नहीं होते हैं । पूर्वाग्रह अतार्किक और विवेकहीन ( urational ) होते हैं । यही कारण है कि जब पूर्वाग्रह से सम्बन्धि सत्य


3 ) पूर्वाग्रह संवेगात्मक रंग के होते हैं ( Prejudice are Emotionally toned ) - पूर्वाग्रह जब धनात्मक अभिव्यक्ति से सम्बन्धित होते है तब व्यक्ति दूसरे लोग , दूसरे समूह , दूसरे जाति और धर्म के लोगों के प्रति स्नेह और प्रेम सम्बन्धि व्यवहार की अभिव्यक्ति करता है । दूसरी और जम पूर्वाग्रह ऋणात्मक अभिवृत्ति से सम्बन्धित होता तब व्यक्ति दूसरे लोगों , दूसरे जाति , दूसरे समूह , दूसरी जाति और धर्म के लोगों के प्रति पणा और विद्वेष आदि सम्बन्धित व्यवहार को अभिव्यक्ति करता हैं । जब पूर्वाग्रह की तीव्रता अधिक होती तब पूर्वाग्रह से सम्बन्धित संवेगात्मक अभिव्यक्ति सुपष्ट दिखायी देती , लेकिन जब पूर्वाग्रह की तीव्रता कम होती है तब संवेगों की अभिवृत्ति पद्यपि दिखायी नहीं देती हैं लेकिन व्यक्ति में विचारात्मक स्तर पर विद्यमान होती हैं । अमेरिका में नीनों लोगों के प्रति गोरे लोगों का व्यवहार बहुधा संवेगात्मक रंग से रंगा होता है । अमेरिका में ही नहीं अपने देश में भी उच्च जाति का निम्न जाति के लोगों के प्रति एक और धर्म के लोगों का दूसरे धर्म के प्रति व्यवहार बहुधा संवेगात्मक रंग से रंगा होता हैं ।

(4) पूर्वाग्रह सन्तोष प्रदान करते हैं ( Prejudices are Satisfing - पूर्वाग्रह सामाजिक दृष्टि से हानिकारक होते हैं फिर भी एक समूह के लोगों में यह विद्यमान रहते हैं । इनके विद्यमान रहने का मुख्य कारण यह दिखाई देता है कि पूर्वाग्रह सन्तोष प्रदान करने वाले होते हैं । इसीलिए यह हानिकारक होते हुए भी समाज के लोगों में विद्यमान रहते हैं । इन्हीं पूर्वाग्रहों के कारण अक्सर हम श्रेष्ठता की भावना का अनुभव करत हैं , सन्तोष प्राप्त करते हैं । कभी - कभी यह भी देखा गया है कि पूर्वाग्रहों के कारण शत्रुता और हिंसा का बहाना मिलता हैं और ऐसा व्यवहार करके भी हम प्रायश्चित के स्थान पर हम सन्तोष का अनुभव करते हैं ।

( 5) पूर्वाग्रह दोषपूर्ण दृढ़ सामान्यीकरण पर आधारित होते हैं ( Prejudices are based on faulty and inflexible generalization ) - पूर्वाग्रह के विकास में तर्क बुद्धि का विशेष महत्व नहीं हैं । बहुधा व्यक्ति समाज को अपने परिवारीजनों व निकट सम्बन्धियों के अनुकरण ( Immitation ) के आधार पर सीखता हैं । इनको उक व्यक्ति अपने व्यवहार का अंग इसलिए बना लेता हैं क्योंकि उसके अनेक परिवारीजन और निकट सम्बन्धी भी इसी प्रकार के पूर्वाग्रह रखते हैं । यही कारण है कि व्यक्ति अपने पूर्वाग्रहों में न तो परिवर्तन करता है और न ही परिवर्तन करने को तैयार होता हैं ।

सन्दर्भ[संपादित करें]