पुनः नियोजन

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कम्प्यूटर, डेटा ट्रांसमिशन, तथा अधिकांश डिजिटल प्रणालियों में पुनः नियोजन या रिसेट (reset) करने से लम्बित पड़ी सारी घटनाएँ या गलतियाँ हटा दी जाती हैं तथा सम्पूर्ण प्रणाली अपनी सामान्य आरम्भिक अवस्था में चला जाता है। यदि कोई निकाय चलते-चलते किसी त्रुटि या समस्या या असामान्य अवस्था को प्राप्त होता है तो प्रायः प्रणाली की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उस निकाय का चालन बन्द कर दिया जाता है तथा 'त्रुटि' का संकेत दे दिया जाता है। रिसेट करने से यह 'त्रुटि' सम्केत हट जाता है, निकाय अपनी सामान्य प्रारम्भिक अवस्था में आ जाता है जिसे चालू किया जा सकता है। कभी-कभी रिसेट करने से वह प्रारम्भिक अवस्था में आकर चालू भी हो जाता है।

अधिकांश कम्प्यूटरों में एक रिसेट लाइन होती है जो कम्प्यूटर को शुरू में पॉवर देते ही सक्रिय होकर कम्प्यूटर को एक सुज्ञात आरम्भिक अवस्था में लाकर छोड़ देती है जिससे कम्प्यूटर के बूट होने की आगे की प्रक्रिया सही तरह से सम्पन्न होती है। रिसेट लाइन यदि मौजूद न होती तो पॉवर-आन के समय हमेशा अनिश्चितता बनी रहती कि कम्प्यूटर किस आरम्भिक स्थिति से शुरू होगा। यदि कम्प्यूतर एक सुनिश्चित आरम्भिक स्थिति से शुरू नहीं होगा तो आगे कुछ भी निश्चित नहीं है। यह अनिश्चितता किसी भी निकाय के लिए स्वीकार्य नहीं है। निकाय इस तरह चल ही नहीं सकता।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]