पिएर जोसेफ प्रूधों

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पिएर जोसेफ प्रूधों

पिएर जोसेफ प्रूधों (Pierre Joseph Proudhon ; १८०९-१८६५) फ्रांसीसी अराजकतावादी विचारक था।

परिचय[संपादित करें]

प्रुधों बज़ासॉन में उत्पन्न हुआ। आर्थिक कठिनाइयों के कारण शिक्षा पूरी न कर सका। बाद में उसने मुद्रणकला सीखी। विद्याव्यसनी तो था ही, उसने अध्ययन और ज्ञानप्राप्ति के प्रत्येक अवसर का उपयोग किया। १८३८ में उसकी 'एसे डि ग्रामेयर जेनरेल' नामक भाषाशास्त्र की पुस्तक प्रकाशित हुई। उस पुस्तक पर बर्ज़ासॉन अकादमी ने प्रूधों को तीन वर्ष तक १५०० फ्रांक सालाना की वृत्ति प्रदान की। राजनीतिक अर्थशास्त्र के अध्ययन में प्रूधों की अत्यधिक रुचि रही; १८४० में उसकी प्रसिद्ध कृति 'ह्वाट इज़ प्रॉपर्टी' प्रकाशित हुई, जिसके प्रथ पृष्ठ पर प्रूधों की प्रधान मान्यता 'संपत्ति चोरी है' अंकित है। इसके पश्चात् उसने दो पुस्तिकाएँ भी लिखीं। अतिक्रांतिकारी विचारों के आरोप में उसपर मुकदमा चलाया गया; किंतु न्यायालय ने उसे मुक्त कर दिया। १८४७ में वह पेरिस चला गया; वहाँ एक मौलिक सुधारवादी के रूप में विख्यात हुआ। फरवरी, १८४८ की क्रांति के पश्चात् उसने एक पत्र निकाला, किंतु राज्य ने उसका प्रकाशन बंद करा दिया। कुछ काल के लिए संसद-सदस्य भी चुना गया; मगर सक्रिय राजनीति में मन न लगा पाने के कारण उसने पुन: अध्ययन और लेखन की अपनाया। १८४९ में उसने एक 'बैंक ऑव पीपुल' की स्थापना का प्रयास किया, जिसका उद्देश्य व्याजप्रथा को समाप्त करना और अंततोगत्वा पूँजी का ही उन्मूलन करना था। इस योजना के असफल होने के साथ प्रूधों जेनेवा चला गया। वहाँ से लौटने पर उसे प्रेस नियमों की अवहेलना के अपराध पर तीन वर्ष का कारावास मिला। कारागार से मुक्त होने पर १८५२ में वह बेल्जियम चला गया, जहाँ उसने लिखने का क्रम जारी रखा।

प्रूधों ने कुल मिलाकर लगभग ४५ पुस्तकें लिखी हैं। राजनीति में अराजकतावाद के दार्शनिक व्याख्याकारों में प्रूधों अग्रणी है। उसके अनुसार संपत्तिसंचय का कोई औचित्य सिद्ध नहीं किया जा सकता। श्रमजन्य उत्पादन से श्रमिक को ही अधिकतम लाभ मिलना चाहिए। वह मूल्य के समाजवादी सिद्धांत से सहमत था। राज्यहीन समाज के सिद्धांत का प्रबल पोषक होने के नाते उसके मान्यता थी कि व्यक्तिगत संविदा समाज का मुख्य आधार होनी चाहिए।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]