पाहवा

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पाहवा अरोरा/अरोड़ा समुदाय का एक उपनाम है |

"पाहवा" उपनाम का आरम्भ कहा से और कैसे हुआ यह विषय अध्ययन के लायक है।

अभी तक इस विषय पर कोई जानकारी प्राप्त नहीं है की पाहवा उपनाम कहाँ से प्रयोग में आया एवं प्रथम पाहवा कौन थे ?


जाति PAHWA PEHOWA से संबंधित है। पिहोवा एक प्राचीन शहर है और इसके धार्मिक महत्व का उल्लेख कई पुराणों में मिलता है, जैसे स्कन्दपुराण (पहली से पांचवीं शताब्दी ईस्वी सन्), मार्कंडेय पुराण (4 ठी से 6 ठी शताब्दी ईस्वी सन्) और वामन पुराण (5 वीं से 11 वीं शताब्दी ईस्वी सन्)।


जब महाभारत युद्ध समाप्त हुआ तो अन्तिम संस्कार करने के लिए शवों के पूर्वजों का पता लगाना लगभग असंभव था। माना जाता है कि युद्ध शुरू होने से पहले भगवान कृष्ण पांडवों को इस स्थान पर ले गए थे और उन्हें सरस्वती माता और उनके पूर्वजों का आशीर्वाद लिया था। भगवान कृष्ण को

किसी मृतक सिपाही के प्रति कोई कठोर भावना या भेदभाव नहीं था। तब भगवान कृष्ण ने पिहोवा के किसानों और ग्रामीणों को जिम्मेदारी से निर्देशित किया कि वे सभी शवों के दाह संस्कार के लिए जाएं। इस सामूहिक दाह संस्कार  तथा

सामूहिक पिंड दान को पिहोवा के किसानों ने अंजाम दिया और खुद का नाम पाहवा रख लिया। बोली जाने वाली भाषा पंजाबी के कारण बाद में अरोराओं की एक उप जाति बन गई। पेहोवा खुद पंजाब (ब्रिटिश भारत) का हिस्सा था


उल्लेखनीय PAHWA

मदन लाल पाहवा

सन्दर्भ[संपादित करें]