पासरीफ़ोर्मीज़
| पासरीफ़ोर्मीज़ Passeriformes | |
|---|---|
| कुछ पासरीफ़ोर्मीज़ पक्षी | |
| वैज्ञानिक वर्गीकरण | |
| जगत: | जंतु |
| संघ: | रज्जुकी (Chordata) |
| वर्ग: | पक्षी (Aves) |
| गण: | पासरीफ़ोर्मीज़ (Passeriformes) लीनियस, १७५८ |
| उपगण और जातियाँ | |
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उपगण इस प्रकार हैं कुल मिलाकर ५,००० से अधिक जातियाँ | |
पासरीफ़ोर्मीज़ (Passeriformes) पक्षियों का एक अत्यंत विशाल जीववैज्ञानिक गण (order) है, जिसमें सभी ज्ञात पक्षी जातियों की लगभग ५०% से अधिक प्रजातियाँ सम्मिलित हैं। इस गण के अंतर्गत आने वाले पक्षियों को सामान्यतः गायक पक्षी (songbirds) या बैठने वाले पक्षी (perching birds) कहा जाता है।
विश्व में आज लगभग ५,००० से ६,५०० प्रजातियाँ पासरीफ़ोर्मीज़ के अंतर्गत वर्गीकृत की गई हैं, जिससे यह न केवल पक्षियों का बल्कि सम्पूर्ण कशेरुकी (vertebrate) (रीढ़दार) प्राणियों में से एक सबसे बड़ा और सर्वाधिक विविध गण है।
पासरीफ़ोर्मीज़ पक्षियों की प्रमुख पहचान उनके पैरों की संरचना है। इन पक्षियों के पाँव के तीन पंजे आगे की ओर तथाा एक पंजा पीछे की ओर होता है। इस प्रकार की संरचना उन्हें डाली, तार या पतली टहनी को आसानी से जकड़कर उस पर संतुलित प्रकार से देर तक बैठने में सक्षम हैं। पासरीफ़ोर्मीज़ की ५,००० से भी अधिक जातियाँ हैं और चौपाये प्राणियों में केवल सरिसृपों के स्क्वमाटा गण में ही इस से अधिक जातियाँ पाई जाती हैं।[1][2][3][4]
विविधता और वितरण
[संपादित करें]पासरीफ़ोर्मीज़ पक्षी अंटार्कटिका को छोड़कर लगभग सभी महाद्वीपों पर पाए जाते हैं। ये उष्णकटिबंधीय वर्षावनों से लेकर शुष्क रेगिस्तानों, पर्वतीय क्षेत्रों और शहरी वातावरण तक में सफलतापूर्वक अनुकूलित हैं।
इस गण के अंतर्गत आने वाले कुछ प्रमुख कुल (families) हैं:
- पैसरिडाए (Passeridae) – गौरैया (sparrows)
- टर्डिडाए (Turdidae) – मैना, बुलबुल, थ्रश
- कोर्विडाए (Corvidae) – कौआ, रेवेन, मैगपाई
- फ्रिंगिलिडाए (Fringillidae) – फिंच
- पैरिडाए (Paridae) – टिट
व्यवहार और पारिस्थितिकी पासरीफ़ोर्मीज़ पक्षी सामान्यतः स्वरप्रधान होते हैं — अर्थात ये जटिल सुर और गीतों के माध्यम से संचार करते हैं। कई प्रजातियाँ अपने मधुर स्वरों के लिए प्रसिद्ध हैं।
इनका आहार विविध होता है — कुछ प्रजातियाँ कीटभक्षी, कुछ बीजभक्षी, तो कुछ फलभक्षी होती हैं। कई प्रजातियाँ परागण, बीज वितरण और कीट नियंत्रण में महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिका निभाती हैं। विकास और वर्गीकरण फॉसिल साक्ष्यों के अनुसार, पासरीफ़ोर्मीज़ का विकास पैलिओसीन या इओसीन युग (लगभग ५५–६० मिलियन वर्ष पूर्व) में हुआ माना जाता है। इनका उद्भव संभवतः ऑस्ट्रेलिया या गोंडवाना महाद्वीप से हुआ और वहाँ से ये पूरे विश्व में फैल गए।
यह गण आधुनिक पक्षियों में सबसे विकसित और जटिल समूह माना जाता है, जिसमें मस्तिष्क का विकास, स्वर तंत्र (syrinx) की जटिलता और व्यवहारिक विविधता उल्लेखनीय है। रोचक तथ्य विश्व का लगभग हर दूसरा पक्षी पासरीफ़ोर्मीज़ समूह का होता है। इनकी कुछ प्रजातियाँ जैसे कौआ और रेवेन अत्यधिक बुद्धिमान मानी जाती हैं। कुछ पासरीफ़ोर्मीज़ पक्षी हज़ारों किलोमीटर लंबी प्रवासन यात्राएँ करने में सक्षम हैं।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Mayr, Ernst (1946). "The Number of Species of Birds Archived 2016-03-04 at the वेबैक मशीन" (PDF). The Auk 63 (1): 67. doi:10.2307/4079907.
- ↑ Stefoff, Rebecca (2008), "The Bird Class", Marshall Cavendish Benchmark
- ↑ Brooke, Michael and Birkhead, Tim (1991) "The Cambridge Encyclopedia of Ornithology", Cambridge University Press ISBN 0521362059.
- ↑ Jones, D. (2008). Flight of fancy. Australian Geographic, (89), 18-19.
Gill, F. B., Ornithology, W. H. Freeman & Co., 2007. Barker, F. K. et al. (2004). “Phylogeny and diversification of the largest avian radiation.” Proceedings of the National Academy of Sciences, 101(30): 11040–11045. World Bird List (IOC), Version 14.2 (2024).