पाक़ीज़ा

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पाक़ीज़ा
Pakeezah.jpg
निर्देशक क़माल अमरोही
लेखक क़माल अमरोही
अभिनेता मीना कुमारी
राज कुमार
अशोक कुमार
भाषा हिन्दी

पाक़ीज़ा (उर्दु: پاکیزہ، पवित्र) एक सन 1972 की बॉलीवुड फिल्म है। यह एक त़वायफ़ की मार्मिक कहानी है और इसे आज तक लता मंगेशकर द्वारा गाये गये मधुर गीतों के लिये याद किया जाता है। फिल्म का निर्देशन क़माल अमरोही ने किया था जो मुख्य नायिका मीना कुमारी के पति भी थे। फिल्म लगभग १४ वर्षों मे बन कर तैयार हुई।

कथानक[संपादित करें]

यह फिल्म पाक़ीज़ा (पवित्र) नरगिस (मीना कुमारी) के बारे में है जो कोठे पर पलती है। वो इस दुश्चक्र को तोड़ पाने में असमर्थ रहती है। नरगिस जवान होती है और एक खूबसूरत और लोकप्रिय नर्तकी / गायिका साहिबजान के रूप मे विख्यात होती है। नवाब सलीम अहमद खान (राज कुमार) साहिबजान की सुंदरता और मासूमियत पर मर मिटता है और उसे अपने साथ, भाग चलने के लिए राजी़ कर लेता है। लेकिन वो जहां भी जाते है लोग साहिबजान को पहचान लेते हैं। तब सलीम उसका नाम पाक़ीज़ा रख देता है और कानूनी तौर पर निका़ह करने के लिये एक मौलवी के पास जाता है। सलीम की बदनामी ना हो यह सोच कर साहिबजान शादी से मना कर देती है और कोठे पर लौट आती है। सलीम अंततः किसी और से शादी करने का निर्णय लेता है और साहिबजान को अपनी शादी पर नृत्य करने के लिए आमंत्रित करता है। साहिबजान जब मुजरे के लिये आती है तो कई राज़ उसका इंतजा़र कर रहे होते हैं।

गीत[संपादित करें]

यह् फिल्म अपने गीतों के लिए भी याद की जाती है, जिनका संगीत गु़लाम मोहम्मद ने दिया था और उनकी मृत्यु के पश्चात फिल्म का पार्श्व संगीत नौशाद ने तैयार किया। प्रमुख गीत हैं: -

  • "चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो, हम हैं

तैयार चलो ...."

  • "चलते च

लते युंही कोई मिल गया था सरे राह चलते चलते ..."

  • "इन्ही लोगों ने ले लीना दुपट्टा

मेरा ...."

  • "ठाढे़ रहियो ओ बाँके यार रे..."
  • " आज हम अपनी दुआओं का असर देखेंगे, तीरे नज़र देखेंगे, ज़ख्मे जि़गर देखेंगे...."
  • "मौसम है आशका़ना..."

सन्दर्भ[संपादित करें]