पलवार

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

पलवार.jpg मल्चिंग.jpg Mulchen.jpg

पलवार (मल्चिंग)[संपादित करें]

एक पतली प्लास्टिक की फिल्म को जमीन के ऊपर रखा जाता है, बीजों को लगाने के लिए नियमित अंतराल पर छिद्रों को छिद्रित किया जाता है, या विकास के शुरुआती चरणों में इसे सीधे पौधों पर रखा जाता है। फिल्मों की खेती की अवधि (आमतौर पर 2-4 महीने) तक होती है और आमतौर पर इसकी मोटाई 12-80μm होती है। प्लास्टिक मल्च के मुख्य कार्य मिट्टी के नमी के वाष्पीकरण को रोकना, बीजों की कटाई और कटाई को कम करना, खरपतवार की वृद्धि को रोकना और कटाव को रोकना है। रंगहीन फिल्मों का उपयोग किया जा सकता है, जिनमें से प्रत्येक विशिष्ट फायदे और दूसरे पर नुकसान हैं। काली फिल्में खरपतवार की वृद्धि को रोकती हैं, लेकिन मिट्टी को गर्म करने के लिए प्रकाश का संचार नहीं करती हैं; स्पष्ट फिल्में प्रकाश को संचारित करती हैं और मिट्टी को गर्म करती हैं, लेकिन खरपतवार के विकास को बढ़ावा देती हैं। [1] पलवार में फसलों के बेकार, पुआल, भूंसी, सूखी पत्तियों का प्रयोग खाली स्थानों को ढ़कनें में किया जाता है जो खाली जगह पर आवरण बनाकर मृदा अपरदन एवं पोषक तत्व क्षरण को निंयत्रित करती है। पहाड़ी क्षेत्रों में फलों के बागों में आवरण फसल एंव पलवार का विशेष महत्व है। जैविक तरीकों के साथ-साथ मल्चिंग प्लास्टिक का अधिक उपयोग किया जा रहा है | सब्जियों एवं फल इत्यादि का उत्पादन में बढ़ोतरी देखा जा रहा है |भूमि के किसी क्षेत्र पर बिछायी जाने वाली सामग्री को पलवार या मल्च (mulch) कहते हैं। पलवार बिछाने के कई प्रयोजन हैं जिनमें से प्रमुख हैं- मल्चिंग.jpg[2]

मल्चिंग के लाभ या फायदे:[संपादित करें]

• मृदा मे नमी संरक्षण एवं तापमान नियंत्रण मे सहायक | • हवा एवं पानी से मिट्टी के कटाव कम करना | • पोधो के वृद्धी के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करना | • उत्पादकता मे सुधार | • भूमि की उर्वरा व स्वास्थ्य की वृद्धि • खर-पतवारों की वृद्धि को रोकना • क्षेत्र के दृष्य-सौन्दर्य को बढ़ाना जरूरी नहीं है कि पलवार कोई जैविक चीज ही हो। पलवार स्थायी हो सकती है (जैसे बार्क चिप) या अस्थायी (जैसे प्लास्टिक की पतली चादरें)।

प्लास्टिक पलवार[संपादित करें]

प्लास्टिक फिल्म या झिल्ली जब पलवार के रूप मे काम मे ली जाती है तो उसे प्लास्टिक पलवार या मल्चिंग भी कहते हैं | ये सस्ती,आसानी से उपलब्ध एवं सभी मोटाई व रंगो मे उपलब्ध होती है |

प्लास्टिक के रंग:[संपादित करें]

प्लास्टिक के विभिन्न रंग जैसे: काले,पारदर्शी,पीला,काला,लाल पलवार के रूप मे उपलब्ध होती है | अधिकतर काले एवं सिल्वर कलर की प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है इस प्लास्टिक के उपयोग से तापमान नियंत्रण ,कीटों पर नियंत्रण,एवं अधिक उत्पादन हेतु इस रंग का प्लास्टिक का उपयोग करना लाभकारी है |

प्लास्टिक फिल्म का चयन:[संपादित करें]

प्लास्टिक फिल्म का चयन हमेशा खेती के जरूरत के अनुसार किया जाना चाहिए |जैसे खरतवार नियंत्रण,मृदा तापमान,को कम व अधिक करना एवं रोग नियंत्रण इत्यादि| सामान्यत: 90 से 120 सेमी.चौड़ी पलवार का चयन करना चाहिए |ताकि कृषी कार्य आसानी से हो सकें| पलवार की मोटाई : यह सामान्यत: फसल के प्रकार एवं उसकी अवधि के अनुसार होता है विभिन्न फसलों के लिए पलवार निन प्रकार है :

    पलवार मोटाई   	     फसल 
       7          	मूंगफल्ली के लिए 
    20 से 25  	    वार्षिक लघु अवधी की फसल हेतु 
    40 से 45  	    द्विवार्षिक मध्ययम वर्गीय फसल हेतु 
   50 से 100     	बहुवार्षिक लंबी अवधी के लिए 

पलवार मल्चिंग का उपयोग कैसे करें:[संपादित करें]

-[१]कई सामग्रियों का उपयोग मल्च के रूप में किया जाता है, जिनका उपयोग मिट्टी की नमी को बनाए रखने,मिट्टी के तापमान को विनियमित करने,खरपतवार की वृद्धि को दबाने और सौंदर्यशास्त्र के लिए किया जाता है। [२] वे मिट्टी की सतह पर लगाए जाते हैं,[3] पेड़ों, रास्तों, फूलों के बिस्तरों के आसपास,ढलानों पर मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए और फूलों और सब्जियों की फसलों के लिए उत्पादन क्षेत्रों में। मुल्क की परतें सामान्य रूप से 2 इंच (5.1 सेमी) या अधिक गहरी होती हैं जब लागू किया जाता है। [3]

प्लास्टिक पलवार को बिछाना:[संपादित करें]

मल्चिंग प्लास्टिक को बीज लगाने एवं पोधे लगाने से पूर्व ही लगाया जाता है|मल्चिंग प्लास्टिक को बिछाने से पहले जमीन की अच्छी जुताई आवश्यक है ,जुताई के बाद 1. मी. चौड़ी क्यारी बनाना है| तैयार क्यारी से पत्थर ,लकड़ी इत्यादि अनावश्यक चीजों को निकाल दें ताकि प्लास्टिक पलवार फट ना जाएँ|अब क्यारी के ऊपर के हिस्से मे ड्रिप की पाइप लाइन बिछा दें|ड्रिप लाइन के उपर प्लास्टिक बिछाना शुरू करें|प्लास्टिक बिछाने के बाद दोनों बाहरी किनारे के हिस्से मे मिट्टी से ढक दें|क्यारी के ऊपर के हिस्से मे 1–1 फिट निश्चित दूरी मे छेद करें|निश्चित जगह मे कम्पोस्ट खाद डालकर चयनित पौधे या बीज लगाएँ|इस तरह नियमित देखभाल से निश्चित ही उत्पादन बेहतर होगा| [4]

सावधानियाँ:[संपादित करें]

• तैयार क्यारी से पत्थर ,लकड़ी इत्यादि अनावश्यक चीजों को निकाल दें ताकि पलवार फट ना जाएँ | • मल्चिंग प्लास्टिक अच्छे क्वालिटी का हो | प्लास्टिक को सही तरीके से लगाए | • किनारे के हिस्से मे मिट्टी अच्छे से ढंका हो | • अच्छे बीज एवं नर्सरी /ग्रीन हाउस मे तैयार किए पौधे का चुनाव कर उपयोग में लाना चाहिए | • आवश्यकता अनुसार पौधे पर कीटनाशक का छिड़काव करें |

संदर्भ:[संपादित करें]

https://web.archive.org/web/20200508060932/https://en.wikipedia.org/wiki/Plasticulture https://web.archive.org/web/20200510235944/https://en.wikipedia.org/wiki/Mulch https://www.gaonconnection.com/kheti-kisani/learn-new-techniques-to-improve-productivity-of-fruits-and-vegetables-through-plastic-mulching-farming-in-india-agriculture https://commons.wikimedia.org/wiki/File:%E0%A4%AA%E0%A4%B2%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0.jpg

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

https://web.archive.org/web/20200401063503/https://commons.wikimedia.org/wiki/Special:UploadWizard

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 8 मई 2020 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 17 मई 2020.
  2. [[https://commons.wikimedia.org/wiki/File:%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97
  3. "संग्रहीत प्रति". मूल से 10 मई 2020 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 17 मई 2020.
  4. https://commons.wikimedia.org/wiki/File:%E0%A4%AA%E0%A4%B2%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0